अंधेरे में डूबते समंदर में रास्ता दिखाने वाले लाइटहाउस

  • इलियट स्टेन
  • बीबीसी ट्रैवल
कैप्री

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इटली का द्वीप कैप्री क़ुदरती ख़ूबसूरती से मालामाल है.

नेपल्स की खाड़ी में स्थित इस द्वीप पर जाएं तो आप को शानदार विला दिखेंगे, रईसाना कोठियां दिखेंगी, बोगेनविलिया के फूल दिखेंगे और दिखेंगे चमकते हुए समुद्र तट. समंदर में ख़रामा-ख़रामा तैरती नावें शाम की मद्धम रोशनी में बेहद दिलकश नज़ारा पेश करती हैं.

मगर इसी द्वीप के कोने में एक बहुमंज़िला अपार्टमेंट है. 64 बरस के कार्लो डि ओरियानो, रोज़ इस इमारत की 136 घुमावदार सीढ़ियां चढ़ते हुए, ऊपरी मंज़िल तक पहुंचते हैं. फिर वो अपनी दूरबीन से दूर तलक समंदर में निगाह दौड़ाते हैं.

कार्लो दूरबीन की मदद से जो कुछ भी देखते हैं, उसे वहीं मौजूद एक डायरी में अपने हाथ से दर्ज करते हैं. ये सिलसिला पिछले 151 साल से चला आ रहा है.

मगर, अब कार्लो के बाद शायद ये रोज़मर्रा का क़िस्सा हमेशा के लिए ख़त्म हो जाए.

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रोज़ 136 सीढ़ियां चढ़ते हैं कार्लो

ऐतिहासिक लाइटहाउस के ऑपरेटर

हम कार्लो के जिस बहुमंज़िला इमारत की सीढ़ियां चढ़ने की बात कर रहे हैं, वो है पुंता करेना का लाइटहाउस यानी प्रकाश स्तंभ. ये इटली का बहुत अहम लाइटहाउस है. पुंता करेना का ये लाइटहाउस 1867 में बना था. यानी तब जब आज के इटली ने पूरी तरह से शक़्ल भी नहीं ली थी. देश कई हिस्सों में बंटा हुआ था.

पुंता करेना का ये लाइटहाउस, इटली के 199 लाइटहाउस में से एक है, जिसे अब पूरी तरह से ऑटोमैटिक किया जा रहा है. इटली के रक्षा मंत्रालय ने कार्लो को पिछले साल बताया कि ये लाइटहाउस 1 जनवरी 2019 से स्वचालित हो जाएगा. फिर उनकी सेवाओं की ज़रूरत नहीं रहेगी.

इस फ़ैसले के बाद कार्लो अपनी नौकरी तो गंवाएंगे ही, 13 साल से जो उनका ठिकाना है, वो भी छिन जाएगा.

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पुंता करेना का लाइट हाउस

तकनीक ने तरक़्क़ी की राह हमवार की है. इंसान के काम आसान किए हैं. उसे नए काम सीखने और नई खोज करने का मौका दिया है. लेकिन इसी तकनीक ने रोज़गार भी छीना है. कार्लो इसी तरक़्क़ी के हालिया शिकार हैं.

एक दौर था जब समुद्र में जहाज़ों को रास्ता दिखाने के लिए लाइटहाउस बहुत महत्वपूर्ण रोल निभाते थे. लेकिन एडवांस तकनीक के बाद अब इनकी ज़रूरत ख़त्म हो गई है. बनने के बाद से अब तक यानी कार्लो को मिला कर 88 लाइटमैन यहां अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

कार्लो इसकी आख़िरी कड़ी होंगे. लाइटहाउस में बिताए दिन याद करते हुए वो कहते हैं कि टावर पर रोशनी करने का काम एक हसीन जज़्बा है. लेकिन, अफ़सोस कि ये दिलकश रोज़गार अब तकनीक की मौत मर रहा है.

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लाइट हाउस में शक्तिशाली लेंस लगे हैं

क्या महत्व है लाइटहाउस का

सदियों पहले दुनिया की खोज में लोग जब समुद्र के रास्ते तलाशने निकले, तो रात के अंधेरे में उन्हें रास्ता दिखाने के लिए समंदर किनारे लकड़ियां जलाई जाती थीं. बाद में मशाल जलाकर ऊंचे टावर पर रखा जाने लगा और यहीं से लाइटहाउस की शुरुआत हुई.

इन मशालों को कोयले, तेल, गैस और फिर बिजली से रोशन किया गया. द लाइटहाउस डायरेक्ट्री के मुताबिक़ बीस हज़ार से भी ज़्यादा ऐसे लाइटहाउस हैं जो दुनिया के सबसे अंधेरे वाले साहिलों को रोशन करते हैं.

पहले के मुक़ाबले समुद्र में आज कहीं ज़्यादा बड़े जहाज़ चलते हैं, और उनकी संख्या भी ज़्यादा है फिर भी लाइटहाउस की उपयोगिता ख़त्म हो गई है क्योंकि आज जहाज़ सैटेलाइट ऑटोमेशन के सहारे चलते हैं. यही वजह है कि लाइटहाउस के साथ-साथ उसके रखवालों की उपयोगिता भी ख़त्म हो गई.

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छिन रही है ऑपरेटरों की नौकरी

1998 में ब्रिटेन में नॉर्थ फ़ोरलैंड लाइटहाउस के आख़िरी संरक्षक ने नौकरी छोड़ दी थी. इसी वर्ष अमरीका में समुद्र तट पर जलाई जाने वाली लाल बत्ती को पूरी तरह ऑटोमेटेड कर दिया गया. ऑस्ट्रेलिया, फ़िनलैंड, आयरलैंड, जापान, न्यूज़ीलैंड, नॉर्वे समेत कई देशों में लंबे समय से किसी भी लाइटहाउस में कोई कर्मचारी नौकरी पर नहीं रखा गया.

दक्षिण अफ़्रीक़ा में एक, फ़्रांस में तीन, म्यांमार, पुर्तगाल और भारत में भी लाइटहाउस के चंद ही पहरेदार बचे हैं. कनाडा में तो 50 से भी कम हैं. इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ़ लाइटहाउस कीपर के अध्यक्ष इयान डफ़ का कहना है कि पूरी दुनिया में बमुश्किल 200 लाइटमैन बचे होंगे. आने वाले दस वर्षों में वो भी ख़त्म हो जाएंगे.

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इटली की लाइटहाउस अथॉरिटी के कप्तान एंटोनेलो डी एस्पोसिटो का कहना है कि लाइटहाउस कीपर की पोस्ट के लिए 1987 के बाद कोई भर्ती नहीं की गई है. लेकिन फिर भी क़रीब पांच हज़ार अर्ज़ियां आ चुकी हैं.

इस पोस्ट के लिए सेना के ही किसी सिपाही को रखा जाता है. कार्लो डी ओरियानो ने 1975 में इटली की सेना में काम शुरू किया था. अगले तीस वर्षों तक उन्हें अलग-अलग ठिकानों पर तैनात किया गया.

कार्लो एक अच्छे हार्बर पायलट, सेलर और नॉटिकल टेक्नीशियन हैं. उनकी क़ाबिलियत की वजह से ही उन्हें 2005 में पुंता करेना लाइटहाउस में तैनात कर दिया गया. पिछले 13 साल से ये लाइटहाउस ही उनका घर है.

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लाइटहाउस से कार्लो जो कुछ देखते हैं, उसे डायरी में नोट करते हैं

रोमांचक नौकरी

कार्लो कहते हैं कि उन्होंने यहां आने से पहले इस जगह की तस्वीर तक नहीं देखी थी. उन्हें लाइटहाउस में काम करने का कोई तजुर्बा भी नहीं था. लेकिन जब पहले दिन यहां काम किया तो लगा कि ये उनकी ज़िंदगी का सबसे बेहतरीन काम है.

लाइटहाउस की ऊंचाई 28 मीटर है. लेकिन, समुद्र की लहरें 25 मीटर तक उठकर जब लाउटहाउस को हिलाती थीं तो लगता था कि भूकंप आ गया है. हालांकि कुछ ही समय में वो इस जगह के मिज़ाज के 00आदी हो गए.

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जिस वक़्त कार्लो ने इस लाइटहाउस में अपनी सेवा देना शुरू की, पुंता करेना में दो बुज़ुर्ग पहरेदार हुआ करते थे, जो लाइटहाउस के छोटे से कमरे में साथ रहते थे. साथ कार्ड खेलते थे, एक ही रसोई में खाना बनाते थे. लेकिन दोनों बारी-बारी से टावर पर जाकर लाइट जलाने का काम करते थे.

2009 में इनके रिटायरमेंट के बाद कोई दूसरा पहरेदार नहीं रखा गया और उनकी ज़िम्मेदारी का भार कार्लो पर आ गया. अब वो अकेले ही यहां रहते हैं. अपने कमरे में क्लासिकल संगीत सुनते हैं और इटली के मशहूर लेखकों के लिखे नाटक पढ़ते हैं.

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कार्लो ख़ुद भी कविताएं लिखते हैं. उनकी कविताएं समुद्र के बारे में होती हैं. रात के अंधेरे में अपने कमरे में बैठकर वो गिटार भी बजाते हैं.

लाइटहाउस के पुराने पहरेदारों के नौकरी छोड़ने के बाद से शायद ही कभी कार्लो डि ओरियानो ने कभी छुट्टी ली हो. यहां तक कि जब उनके घुटने का ऑपरेशन हुआ तब भी वो दिन में दो बार टावर पर लाइट जलाने के लिए चढ़ते थे.

कार्लो कहते हैं कि बिजली से टावर की लाइट तो रोशन की जा सकती है, लेकिन टावर पर किसी इंसान की मौजूदगी ज़रूरी है. हो सकता है समुद्र से गुज़रते हुए किसी को मदद की दरकार हो. उनकी डायरी में लिखे नोट्स से पता चलता है कि कई मौक़ों पर उन्होंने समुद्र में हादसों के शिकार लोगों की मदद की है.

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अब क्या होगा

पुंता करेना को पूरी तरह ऑटोमेटेड करने की तैयारी कर ली गई है. लेकिन नेशनल सेलर्स एसोसिएशन ऑफ़ इटली इसका विरोध कर रही है. कैप्टन एंटोनिनो टर्मिनेलो का कहना है कि इस इलाके में मोबाइल सिग्नल, जीपीएस वग़ैरह की सुविधा नहीं है. इसलिए यहां हर काम सुचारू रूप से करने के लिए किसी इंसान का होना ज़रूरी है.

कार्लो ने इस जगह को अपनी ज़िंदगी के 13 साल दिए हैं. वो आज भी यहां से जाना नहीं चाहते. लेकिन सरकार ने उनके रिहाइशी हिस्से और पहरेदारों के कमरों को लग्ज़री रिजॉर्ट में तब्दील करने का इंतज़ाम कर लिया है.

अब कार्लो हर महीने मिलने वाली सैलरी से कुछ पैसे बचा कर दूर-दराज़ में अपना एक छोटा सा प्लॉट लेने की तैयारी कर रहे हैं. उन्हें उम्मीद है कि किसी रोज़ उनकी कविताओं का संग्रह छपेगा और दुनिया उनकी नज़र से समुद्र और लाइटहाउस की ज़िंदगी समझ पाएगी.

वो लाइटहाउस छोड़ कर ज़रूर चले जाएंगे, लेकिन उनका दिल यहीं रहेगा.

(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी ट्रैवल पर उपलब्ध है.)

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