चीन में रहना है तो क्यूक्यू कोड को रटने की आदत डालनी पड़ेगी

  • 17 फरवरी 2019
क्यूक्यू कोड, चीन इमेज कॉपीरइट Jeremy Sutton-Hibbert/Alamy Stock Photo

मैं चीन की राजधानी बीजिंग की नई-नई निवासी हूं. शहर में आने के साथ ही मैंने अपने-आप को कुछ बातों को लेकर तैयार किया.

पहली बात तो ये कि सुबह मैं किस वक़्त घर से निकलूं ताकि ख़ुद को भीड़ में कुचले जाने से बचा सकूं. शहर का सबसे बेहतरीन माला चियांग गुओ यानी हॉट पॉट का चाइनीज़ अवतार कहां मिलता है.

बीजिंग में मैंने अपने दिमाग़ को ये भी याद कराया कि टॉयलेट पेपर को कभी भी फ्लश नहीं करना है. साथ ही मैंने ये भी सीखा कि सूप में पड़े हुए टुकड़ों को सीधे मुंह में नहीं डालना है. बल्कि, उसे हल्का सा छेड़कर फिर सूप को सुड़कना है.

क्यूक्यू कोड

पर, तमाम कोशिशों के बावजूद मैं ख़ुद को अपना क्यूक्यू कोड याद नहीं दिला सकी.

9, 10 या 11 अंकों का ये कोड, चीन की मैसेजिंग सर्विस को इस्तेमाल करने के लिए होता है. चीन में क्यूक्यू के मैसेज का बहुत इस्तेमाल होता है.

कई दफ़्तरों में तो इसे आधिकारिक मैसेजिंग सेवा के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. मेरी कंपनी में भी ऐसा ही था. लेकिन, बार-बार इस्तेमाल करने के बावजूद मैं इसे याद नहीं कर पाती थी.

इसीलिए अपने दफ़्तर के कंप्यूटर पर मैंने अपना क्यूक्यू अकाउंट खुला छोड़ दिया था. ताकि, कोड भूलने के बाद भी मैं इसकी सेवाओं का इस्तेमाल कर सकूं.

अपने विभाग की मैं इकलौती विदेशी कर्मचारी थी. मेरे चीन के सहकर्मियों को ये कोड याद रखने में ज़रा भी दिक़्क़त नहीं होती थी.

चीन में 2 साल से ज़्यादा वक़्त गुज़ारने के बावजूद मुझे वो नंबर याद नहीं हो सके हैं.

मैंने एक बार पड़ोस के दफ़्तर में काम करने वाले ब्रिटिश नागरिक से पूछा कि क्या उसे अपना क्यूक्यू कोड याद है. उसे भी ये कोड नहीं याद था. उसके अमरीकी दोस्तों का भी यही हाल था.

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हम सब मिलकर शिकायती सुर में बोले थे कि आख़िर ये नंबरों का क्या मसला है? अंकों के बजाय हम अक्षरों का इस्तेमाल क्यों नहीं कर सकते?

लेकिन, चीन के लोगों को न सिर्फ़ क्यूक्यू कोड बल्कि ऐसे ही तमाम सेवाओं के नंबर बड़ी आसानी से याद हो जाते थे.

वेबसाइट के नाम हों, या फिर कोई सेवा देने वाली कंपनी का पता, हर जगह नाम के बजाय अंकों का इस्तेमाल होता है. यहां तक कि गाली देने के लिए भी नंबर ही काम में आते हैं.

चीन की संस्कृति में कुछ अंक बेहद महत्वपूर्ण हैं, पवित्र हैं. तो कुछ ऐसे हैं जिनका ज़िक्र भी अशुभ माना जाता है. वैसे ये परंपरा तो हमारे यहां भी है. पर, चीनियों को अंकों से कुछ ज़्यादा ही लगाव है.

मसलन एक रोज़ जब मैं एक टूरिस्ट वेबसाइट के महंगे टिकटों का ज़िक्र कर रही थी, तो मेरी रूममेट पानबी ने कहा कि, 'तुम 12306 क्यों नहीं ट्राई करतीं?'

मैंने उससे पूछा कि क्या ये कोई हेल्पलाइन नंबर है. तो पानबी ने बताया कि ये तो चीन की आधिकारिक रेलवे वेबसाइट है.

बात यहीं तक सीमित नहीं. बहुत सी ई-मेल सेवाएं भी नंबर पर आधारित हैं. जैसे कि 163.कॉम या फिर 126.कॉम.

एक गैर चीनी ने तो इन्हें फ़र्ज़ी ई-मेल कंपनियां बताकर ख़ारिज भी कर दिया था. पर, स्थानीय दोस्तों ने उसे समझाया कि ये दोनों ही कंपनियां असली हैं.

चीन के लेखक फ्रैंकी हुआंग ने बताया कि चीन की भाषा के शब्द टाइप करने के बजाय ये नंबर टाइप करना बहुत आसान होता है. इसीलिए कंपनियों से अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए नंबरों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया.

चीनी ज़बान में अंकों को लिखना भी मुश्किल होता है. इसलिए रोमन अंकों का इस्तेमाल किया जाता है.

फ्रैंकी कहती हैं कि नंबर को तेज़ी से टाइप किया जा सकता है. इसलिए बहुत सी सेवाओं ने अक्षरों के बजाय अंकों को तरज़ीह देना ठीक समझा.

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अलीबाबा, नेटफ्लिक्स, मैक्डोनल्ड के लिए अंक

कई बार कंपनियां अपने पुराने हेल्पलाइन नंबर को ही वेबसाइट का पता बना लेती हैं. जैसे कि, चीन की इंटरनेट कंपनी नेटईज़ है. इसका हेल्पलाइन नंबर 163 था, तो आज इसी नाम से वेबसाइट है.

इसी तरह चाइना टेलीकॉम और चाइना यूनिकॉम जैसी बड़ी कंपनियां भी अपनी वेबसाइट नंबर से चलाती हैं, जैसे कि 10086.कॉम.

इसी तरह कई कंपनियां अपने नाम जैसी आवाज़ वाले अंकों का इस्तेमाल किया करती हैं. जैसे मशहूर कंपनी अलीबाबा की वेबसाइट का नंबर है-1688.कॉम. इन अंकों को चीनी भाषा में ई-लियो-बा-बा कहकर पढ़ा जाएगा. इसीलिए इस नंबर से वेबसाइट शुरू की गई.

वहीं, मैक्डोनल्ड जैसी कंपनियां अपने तमाम उत्पादों को भी अंक से ही ऑर्डर करने को तरज़ीह देती हैं. जैसे कि मैक्मफ़िन. इसके लिए आप को चीन में मैक्डी की वेबसाइट पर 4008-517-517.सीएन टाइप करना होगा. इसकी वजह ये है कि चीनी भाषा में 517 को ऐसे बोला जाता है, जिसका मतलब निकलता है कि मै खाना चाहता/चाहती हूं. 51जॉब्स.कॉम वेबसाइट को चीनी भाषा में बोलते हैं, तो अर्थ निकलता है कि मैं नौकरी चाहता हूं.

नेटफ्लिक्स जैसी वीडिओ स्ट्रीमिंग सेवा में 6 का मतलब है दिखाना.

अगर आप चीन में लंबा वक़्त गुज़ार लेते हैं तो आप को इन अंकों को रटने की आदत हो जाएगी.

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नंबर-4 से चीन को इतना परहेज क्यों?

मेरा बचपन से ही बीजिंग आना-जाना था. मेरे पिता टाइझोऊ नाम के शहर में काम करते थे. तो, मैं कुछ महीनों के अंतर पर चीन का दौरा कर जाती थी.

जब मैं उनके अपार्टमेंट में गई, तो मैंने ग़ौर किया कि उनकी बिल्डिग में चौथी मंज़िल थी ही नहीं. वजह ये है कि चार का चीनी भाषा में उच्चारण ऐसे होता है कि उसका मतलब मौत हो जाता है. न तो कभी भी चार लोग आप को दिखेंगे और न ही चार चीज़ें एक साथ चीन में परोसी जाती हैं.

फ्रैंकी हुआंग बताती हैं कि शंघाई में वो जिस इमारत में रहती हैं, वहां तो अंधविश्वास की हद ही पार हो गई. इस इमारत में तो 4, 14, 24 और 34वीं मंज़िलें ही नहीं हैं. इमारत में 13वीं मंज़िल भी नहीं है.

चीन में 8 नंबर को बेहद लकी माना जाता है. इस अंक की नंबर प्लेट भारी क़ीमत देकर ही हासिल होती है. 88 नंबर हो जाएं, तो सोने पर सुहागा. वहीं, अगर एक साथ 888 नंबर हों, तो इसे बेचकर कमाई भी की जा सकती है.

चीन की राजनीति में भी अंकों का खेल होता है. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 4 बड़े सिद्धांत प्रतिपादित किए हैं. वहीं, चेयरमैन मओ ने 4 पुरानी बातों, पुराने विचारों, चार संस्कृतियों और परंपराओं का प्रयोग करने की सीख दी थी.

पूर्व राष्ट्रपति जियांग ज़ेमिन ने 3 रिप्रेज़ेंट्स नाम से अपना सियासी सिद्धांत प्रचारित किया था.

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अंकों का खेल

चीन में इंटरनेट के स्लैंग या भद्दी भाषा में भी नंबरों की ख़ास जगह है.

748 का मतलब है कि-भाड़ में जाओ.

555 का मतलब रोती हुई इमोजी होता है.

233 का मतलब आप हंस रहे हो.

520 का मतलब है-आई लव यू.

अगर आप पूरी शिद्दत से प्यार जताना चाहते हैं कि मैं तुम्हें 10 हज़ार बार से भी ज़्यादा प्यार करता/करती हूं, तो. इसके लिए 2010000 भी कह सकते हैं.

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