दुनिया का सबसे पुराना मध्यकालीन मानचित्र

  • 12 अप्रैल 2019
मैपा मुंडी
Image caption मैपा मुंडी

आज कहीं जाना हो और आप रास्ता न जानते हों, तो बस गूगल मैप की मदद लेनी है. आप गली-कूचों से होते हुए, जाम वाले हिस्सों से बचते हुए अपनी मंज़िल तक पहुंच जाएंगे.

पर आज से सैकड़ों साल पहले, जब इंसान को पूरी दुनिया की ख़बर तक नहीं थी, तब रास्ता बताने वाले नक़्शे बनाना भी बहुत मुश्किल काम था. यूरोप को ख़बर नहीं थी कि अमरीका महाद्वीप भी है.

ऑस्ट्रेलिया के बारे में किसी को पता ही नहीं था. यानी, दुनिया केवल एशिया, यूरोप और उत्तरी अफ़्रीका तक ही सिमटी थी.

उस दौर का नक़्शा देखना भी दिलचस्प तजुर्बा है. मध्यकालीन यूरोप में बना सबसे पुराना नक़्शा इंग्लैंड के एक गिरजाघर में रखा हुआ है.

ये विशाल गिरजाघर हेयरफ़ोर्ड कैथेड्रल के नाम से जाना जाता है, जो वाय नदी के किनारे सातवीं सदी से खड़ा है.

गिरजाघर की मौजूदा इमारत को ईसा की ग्यारहवीं सदी में बनवाया गया था. इस इमारत को ब्रिटेन के नॉर्मन स्थापत्यकला का सबसे शानदार नमूना कहा जाता है.

Image caption हेयरफ़ोर्ड कैथेड्रल में दुनिया का सबसे बड़ा और अब तक बचा ज़ंजीर वाला पुस्तकालय है, जहां किताबें ज़ंजीर से बंधी होती हैं

मैग्ना कार्टा की प्रतियों में से एक यहां मौजूद

इस गिरजाघर की सबसे बड़ी ख़ूबी यहां सहेजकर रखी गई विरासतें हैं. इस कैथेड्रल में दुनिया का सबसे बड़ा और अब तक बचा ज़ंजीर वाला पुस्तकालय है, जहां किताबें ज़ंजीर से बंधी होती हैं.

इस चर्च में दुनिया का पहला संविधान कहे जाने वाले दस्तावेज़ मैग्ना कार्टा की गिनी चुनी प्रतियों में से एक मौजूद है.

पर, हेयरफोर्ड गिरजाघर में जो सबसे दिलचस्प चीज़ रखी है, वो है मध्य युग के यूरोप का नक़्शा. इसका लैटिन भाषा में नाम है-मैपा मुंडी. ये दुनिया के सबसे पुराने, सबसे बड़े और अजीबो-ग़रीब नक़्शों में से एक है.

Image caption हेयरफोर्ड गिरजाघर

मैपा मुंडी

मैपा मुंडी का लैटिन भाषा में मतलब होता है दुनिया का मानचित्र या नक़्शा. ये 1.59 मीटर लंबा और 1.34 मीटर चौड़ा यानी काफ़ी बड़ा है. इस में 13वीं सदी के यूरोप के लोगों की जानकारी वाला भूगोल ही नहीं, इतिहास और धार्मिक जानकारियां दर्ज हैं.

माना जाता है कि ये मानचित्र 1300 ईस्वी के आस-पास बनाया गया होगा. इसमें रौशनाई से क़रीब 500 चित्र बनाए गए हैं. नक़्शे को बछड़े के चमड़े पर उकेरा गया है. ये मध्यकाल के यूरोपीय और ईसाई समाज की समझ को दर्शाता है.

मैपा मुंडी, यूनेस्को के विश्व यादगार रजिस्टर में दर्ज है. इसके बारे में लिखा गया है कि मैपा मुंडी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध उस दौर का इकलौता नक़्शा है.

कई मायनों में ये अपने दौर का तस्वीर वाला कोश है. इस में बाइबिल से प्रेरित चित्रकारी है.

इसके अलावा मानवता के इतिहास के अहम पड़ावों को भी रेखांकित किया गया है. साथ ही इस नक़्शे में 420 शहरों और भौगोलिक ठिकानों को दर्ज़ किया गया है.

मैपा मुंडी में केवल जगहों के नाम ही नहीं हैं. इसमें आप को पौधों, जानवरों, परिंदों और अजीबो-ग़रीब जीवों के चित्र भी मिलेंगे.

Image caption मैपा मुंडी उस दौर का एकमात्र नक्शा है

धरोहरों का ख़ज़ाना

इसकी मदद से आप पुनर्जागरण काल के यूरोप की झलक पा सकते हैं. हेयरफ़ोर्ड कैथैड्रल के प्रमुख रेवरेंड क्रिस पुलिन कहते हैं कि इस गिरजाघर में बहुत सी ऐतिहासिक धरोहरों का ख़ज़ाना है. मैपा मुंडी इनमें सबसे ख़ास है. पर, ये नक़्शा यहां कैसे पहुंचा, ये बात अब तक राज़ ही है.

इस गिरजाघर की लाइब्रेरियन और इतिहासकार डॉक्टर रोज़मेरी फर्मेन कहती हैं कि मैपा मुंडी का अनुवाद है 'दुनिया का कपड़ा'.

डॉक्टर रोज़मेरी के मुताबिक़, इसमें कारोबारी रास्तों और तीर्थयात्रा के रूट को दिखाया गया है. लेकिन, इसे आप सही मायने में नक़्शा भी नहीं कह सकते. क्योंकि इसमें बहुत से अजीब तरह के जीव और इंसानों के चित्र भी उकेरे गए हैं.

आज की तारीख़ में न ऐसे लोग दिखेंगे और न ही ऐसे जीव, जिनकी तस्वीरें इस नक्शे में बनाई गई हैं. इसमें आप को भेड़िए या कुत्ते जैसे सिर वाले इंसानों के चित्र भी मिलते हैं. ज़ाहिर है कि ऐसे इंसानों का कोई अस्तित्व नहीं है. पर ये तस्वीरें क्यों बनाई गई हैं, ये बात समझ से परे है.

अजीब इंसानों के चित्र

हेयरफोर्ड गिरज़ाघर की इतिहासकार और लेखिका सारा एरोस्मिथ कहती हैं कि मैपा मुंडी में कई अजीब चित्र बने हैं. असल में इनके ज़रिए यहूदियों की बुरी छाप मिलती है.

इसमें जिन अजीब इंसानों के चित्र हैं, वो सारा एरोस्मिथ के हिसाब से उन समुदायों के लोगों की हैं, जिन्हें नक़्शा बनाने वाले बुरी नज़र से देखते थे, या उनके बारे में नहीं जानते थे. ऐसे चित्र प्लिनी की किताब नेचुरल हिस्ट्री में भी मिलते हैं. यानी ऐसे चित्र बनाना उस दौर का चलन था.

लेखिका और इतिहासकार डॉक्टर मार्सिया कुपफर कहती हैं कि ये किसी ख़ास नस्ल के चित्र नहीं. उस दौर में नस्ल की सोच विकसित ही नहीं हुई थी. ये लोगों की तस्वीरें हैं. नक़्शे को बनाने वालों ने इनके ज़रिए बताया है कि ईश्वर ने न जाने कितने तरह के जीव रचे हैं, जिनके बारे में मालूम नहीं.

इस नक़्शे में यरूशलम को दुनिया का केंद्र बताया गया है. मैपा मुंडी उस दौर के ईसाई समाज की धार्मिक-सामाजिक मान्यताओं को सजीव रूप में प्रस्तुत करता है.

मध्यकालीन यूरोप में ऐसे सैकड़ों नक़्शे बनाए गए थे. पर, इनमें से ज़्यादातर समय के थपेड़ों से नष्ट हो गए. इसमें उकेरे गए रास्तों के बावजूद इन्हें रास्ता बताने वाला मानचित्र नहीं माना जाता.

उस दौर में यूरोप के लोगों को दुनिया के बारे में जितना पता था, उसमें समंदर और महाद्वीपों की शक़्लें अजीब दिखती हैं.

उस वक़्त यूरोप के लोगों को केवल यूरोप, एशिया और उत्तरी अफ्रीका के महाद्वीपों का पता था.

नक़्शे में लाल सागर को लाल रौशनाई से दिखाया गया है, तो नदियों को नीले रंग से उकेरा गया है. एशिया और पूरब से सूरज उगता था, तो ईसाई मान्यता के हिसाब से इसी रास्ते से एक बार फिर ईसा मसीह आएंगे. यही वजह है कि इस हिस्से को नक़्शे में सबसे ऊपर रखा गया है.

पेरिस और रोम उस दौर के बड़े शहरों में से हैं. वहीं हेयरफ़ोर्ड को छोटे से धब्बे के तौर पर ही दिखाया गया है.

नक़्शे में ओल्ट टेस्टामेंट की कहानियां भी

नक़्शे में यूनानी और रोमन पौराणिक कथाओं के चित्र भी बने हुए हैं. साथ ही इसमें बाइबिल की कहानियों को उकेरा गया है, ख़ास तौर से ओल्ड टेस्टामेंट की कहानियों को जगह दी गई है, जैसे आदम और हौव्वा और बाबेल की मीनार.

मैपा मुंडी में अफ्रीका वाले हिस्से में अजीबो-ग़रीब जीवों के चित्र उकेरे गए हैं. साथ ही इस हिस्से में भाले और ढाल के चित्र भी मिलते हैं, इसी तरह एक बड़े पैर वाले इंसान की तस्वीरें भी बनाई गई हैं. इनमें से एक का पैर उस जगह दिखता है, जो नक़्शे में भारत के नाम से दर्ज है.

ईसाई धर्म का असर इस नक़्शे पर साफ़ दिखता है. नक़्शे में सबसे ऊपर ईसा मसीह हैं, जो दुनिया पर नज़र रखते हैं. साथ ही नक़्शे में यहूदियों से नफ़रत के संकेत भी साफ़ मिलते हैं.

1290 में इंग्लैंड के राजा एडवर्ड ने यहूदियों को अपने देश से निकाल दिया था. यहूदियों के पैग़म्बर मूसा को पीली सींगों के साथ ईश्वर से पैग़ाम लेते हुए दिखाया गया है.

ये नक्शा किसने बनाया?

इस नक़्शे को किसने बनाया, ये किसी को नहीं पता. पर, इतिहासकार मानते हैं कि मैपा मुंडी को कई लोगों ने मिलकर ही रचा होगा.

किसी एक इंसान ने जगहों के नाम लिखे होंगे, तो कई कलाकारों ने मिलकर इस पर चित्र उकेरे होंगे.

माना जाता है कि मध्यकाल में इंग्लैंड के नक़्शों के कमिश्नर रिचर्ड ऑफ हैल्डिंघम पास ही स्थित लिंकन क़स्बे में रहा करते थे. शायद मैपा मुंडी वहीं से हेयरफ़ोर्ड के गिरजाघर पहुंचा.

इतिहासकार सारा एरोस्मिथ मानती हैं कि मध्यकाल में जो लोग इस गिरजाघर में आते होंगे, वो ये नक़्शा देख कर हैरान होते होंगे. इसे दो दरवाज़ों के भीतर बंद कर के रखा जाता था और कुछ ख़ास दिनों में ही आम लोग इसे देख पाते थे.

हेयरफ़ोर्ड गिरजाघर में दुनिया की सबसे पुरानी ज़ंजीरों वाली लाइब्रेरी भी है. इस में 229 पुरानी किताबें और दस्तावेज़ रखे हुए हैं, जो उसी दौर की ज़ंजीरों से बंधे हैं. असल में पुराने ज़माने में इन दस्तावेज़ों, पांडुलिपियों और किताबों की सुरक्षा के लिए लाइब्रेरी में इन्हें ज़ंजीरों से बांध कर रखा जाता था.

Image caption हेयरफ़ोर्ड कैथेड्रल

हेयरफ़ोर्ड कैथेड्रल में इंग्लैंड में क़ानून और संविधान का बुनियादी दस्तावेज़ कहे जाने वाले मैग्ना कार्टा की एक प्रति भी रखी हुई है. इसे 1217 में इंग्लैंड के राजा हेनरी तृतीय ने जारी किया था. आज मैग्ना कार्टा की केवल चार प्रतियां ही दुनिया भर में मौजूद हैं. इन में से एक हेयरफ़ोर्ड कैथेड्रल में रखी है.

मैग्ना कार्टा की अहमियत इस बात से समझी जा सकती है कि इस क़ानूनी दस्तावेज़ के ज़रिए पहली बार इंग्लैंड के राजा के अधिकार सीमित किए गए थे. साथ ही आम जनता के अधिकारों को क़ानूनी तरीक़े से सुरक्षित किया गया था.

700 साल से भी ज़्यादा पुराने मैपा मुंडी को देखने के लिए दुनिया भर से हज़ारों लोग हर साल हेयरफ़ोर्ड गिरजाधर आते हैं.

सदियों से इस पर रौशनी डालने के लिए मशाल के इस्तेमाल और छूने की वजह से बहुत से चित्र धूमिल पड़ गए हैं.

2013 में इसकी 3डी स्कैनिंग की गई. अब जो लोग इसे देखने के लिए हेयरफ़ोर्ड तक नहीं आ सकते, वो ऑनलाइन भी इस नक़्शे को देख सकते हैं.

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