पर्यावरण के मोर्चे पर दुनिया में नंबर वन क्यों है नॉर्वे

  • 28 अप्रैल 2019
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जलवायु के बारे में सबसे ताज़ा रिपोर्ट डराने वाली है. 'साइंस' जर्नल में छपी रिसर्च की मानें तो समंदर हमारी सोच से 40 फ़ीसदी ज़्यादा तेज़ी से गर्म हो रहा है.

जलवायु परिवर्तन पर नज़र रखने वाले यूएन के वैज्ञानिकों ने अक्तूबर 2018 में चेतावनी दी थी कि अगर कड़े कदम नहीं उठाए गए तो बढ़ते तापमान की वजह से 2040 तक भयंकर बाढ़, सूखा, अकाल और जंगल की आग का सामना करना पड़ सकता है.

जलवायु परिवर्तन के ख़तरों से निपटने के लिए वैश्विक समुदाय को लंबा सफ़र तय करना है, लेकिन गुड कंट्री इंडेक्स के मुताबिक कुछ देश इसमें सकारात्मक योगदान दे रहे हैं.

इस सूचकांक का मकसद धरती और इसकी जलवायु पर अलग-अलग देशों के प्रभाव को मापना है.

इसे तैयार करने वाले स्वतंत्र नीति सलाहकार सिमॉन एन्होल्ट कहते हैं, "भूमंडलीकरण और पारस्परिक निर्भरता के युग में हर चीज का पूरी व्यवस्था पर असर पड़ता है, चाहे तुरंत हो या देर से."

"मैं ऐसा पहला इंडेक्स बनाना चाहता था जिससे यह मापा जा सके कि किसी देश का उसकी सीमाओं के बाहर पूरी मानवता और धरती पर क्या प्रभाव पड़ता है."

इस सूचकांक की टॉप 10 रैंकिंग में यूरोपीय देशों का दबदबा है, लेकिन दुनिया भर के कई देश पर्यावरण पर अपने नकारात्मक प्रभाव को कम करने की सफल कोशिशें कर रहे हैं.

हमने ऐसे 5 देशों के निवासियों से बात की और उनसे पूछा कि उनको ऐसे देश में रहना कैसा लगता है जो इस धरती को बचाने की कोशिशों में जुटा है.

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Image caption इलेक्ट्रिक कार

नॉर्वे: इंडेक्स रैंकिंग 1

धरती और जलवायु में सकारात्मक योगदान देने वाले देशों की सूची में नॉर्वे अव्वल है. पर्यावरण के लिए इसने कई पहल का नेतृत्व किया है.

नॉर्वे के लोगों ने सबसे ज़्यादा इलेक्ट्रिक कारें अपनाई हैं और सरकार ने शपथ ली है कि 2030 तक यह देश उस मुकाम पर पहुंच जाएगा जहां से वह पर्यावरण को कोई क्षति नहीं पहुंचाएगा.

प्रकृति के साथ इस देश का रिश्ता नीतियों से बहुत आगे तक है. नॉर्वे के लोगों ने खुले में रहने की अवधारणा को अपनाया है. वे सेहतमंद और खुश रहने के लिए घर के बाहर वक़्त बिताने की अहमियत को समझते हैं.

नॉर्वे में बाइक शेयरिंग प्रोग्राम चलाने वाली कंपनी "अर्बन शेयरिंग" के संस्थापक और सीईओ एक्सेल बेन्टसेन कहते हैं, "यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है. बहुत लोगों के लिए यह धर्म जैसा है."

"हम सभी मौसम में घर के बाहर समय बिताते हैं. हमारे बच्चे बाहर झपकी भी ले लेते हैं. राजधानी ओस्लो इस मामले में अद्वितीय है कि आप यहां सीधे जंगल से आ-जा सकते हैं."

2019 में यूरोपीय आयोग ने जलमार्ग बहाल करने, साइकिलिंग और सार्वजनिक परिवहन पर निवेश करने और कार्बन डायऑक्साइड उत्सर्जन को ट्रैक करने का तरीका खोजने के लिए ओस्लो को यूरोप की ग्रीन कैपिटल घोषित किया था.

इस शहर ने अपने केंद्रीय हिस्से को कार से मुक्त कर लिया है. पार्किंग स्पेस को हटाकर वहां पैदल चलने वालों और बाइक के लिए ज़्यादा जगह बनाई गई है.

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जलवायु परिवर्तन से किस तरह हो रहा है नुकसान

नॉर्वे की घरेलू ऊर्जा ज़रूरतों का 99 फ़ीसदी हिस्सा पनबिजली से पूरा होता है, फिर भी यह देश एक प्रमुख तेल उत्पादक और निर्यातक है जो एक विवादित राजनीतिक मुद्दा बन चुका है.

ब्रिटेन के डेविड निकेल 2011 से नॉर्वे में रह रहे हैं और वहां के जीवन पर ब्लॉग लिखते हैं.

वह पूछते हैं, "क्या तेल और गैस का निरंतर उत्पादन और निर्यात उचित है क्योंकि इससे पर्यावरणीय ढांचे पर ख़र्च करने के लिए ढेर सारा पैसा मिलता है?"

"बहुत लोग सोचते हैं कि यह (ख़र्च) दूसरे शहरों और देशों को प्रेरित करेगा और अंततः एक हरी-भरी दुनिया बनेगी. लेकिन दूसरे कई लोग सोचते हैं कि यह दोहरा मापदंड है. यह आप पर निर्भर है कि आप इनमें से क्या सही समझते हैं."

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न्यूयॉर्क जलवायु परिवर्तन से निबटने की तरफ़ हुई प्रगति के बारे में बताएगा.

पुर्तगालः इंडेक्स रैंकिंग 3

धरती की तंदुरुस्ती में योगदान देने वाले देशों में पुर्तगाल तीसरे पायदान पर है.

यह देश इलेक्ट्रिक कार के लिए चार्जिंग स्टेशनों (जो हाल तक मुफ्त थे) का नेटवर्क बनाने में निवेश करने वाले शुरुआती देशों में है.

पुर्तगाल ने अपने नागरिकों को कम दर पर सौर ऊर्जा और अक्षय ऊर्जा अपनाने को प्रेरित किया है. उनके पास ज़रूरत से ज़्यादा बिजली हो तो वे उसे वापस ग्रिड को बेच सकते हैं.

मारियाना मेगल्हेस मूल रूप से पुर्तगाल की हैं और अब ब्रिटेन में रहती हैं. वह एक ब्रांडिंग एजेंसी में संचार प्रबंधक हैं.

वह कहती हैं, "मेरे ज़्यादातर पड़ोसियों ने या तो सोलर पैनल लगवाए हैं या पानी का पंप लगाया है. मेर घर में मेरे माता-पिता ने यह पंप लगवाया है जो बारिश के पानी को साफ़ पानी में बदलता है. हम उसे पौधों में देते हैं, कपड़े धोते हैं और पालतू जानवरों को पिलाते हैं."

वह हैरान होती हैं पुर्तगाल में उनके छोटे शहर के मुक़ाबले लंदन में कितने कम इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग स्टेशन हैं.

चीजों को दोबारा इस्तेमाल के लायक बनाना और हरे कचरे से खाद बनाना पुर्तगाल के सामान्य जीवन का हिस्सा है. यहां अलग-अलग तरह के कचरे के लिए अलग डिब्बे होते हैं, बैटरी के लिए खास तौर पर.

रोजमर्रा के हरित प्रयासों को वास्तविकता में बदलने में शिक्षा ने बड़ी भूमिका निभायी है.

मेगल्हेस कहती हैं, "हाई स्कूल में पर्यावरण शिक्षा पर हमारी कई कक्षाएं होती थीं. पर्यावरण के प्रति हमारा प्यार बढ़ाने के लिए स्थानीय पार्क में हमारी कक्षाएं लगती थीं."

पुर्तगाल सदियों से कृषि प्रधान रहा है. इसने अपने प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल किया है.

"उत्तर में पुर्तगाल और स्पेन की सीमा पर पहाड़ों के ऊपर आप पवनचक्कियां देख सकते हैं. झीलों पर पनबिजली घर बनाए गए हैं."

दक्षिणी पुर्तगाल में रहने वाली जोआना मेंडिस कहती हैं, "हमारी प्राकृतिक परिस्थितियां अक्षय ऊर्जा के पक्ष में हैं. वह सस्ती भी हैं, इसलिए हम धीरे-धीरे उनकी तरफ जा रहे हैं."

राजधानी लिस्बन पहाड़ी पर बसी है इसलिए यहां यूरोप की दूसरी राजधानियों की तरह साइकिलें नहीं दिखतीं, लेकिन पर्यावरण के अनुकूल परिवहन के दूसरे साधनों का इस्तेमाल बढ़ा है.

दो साल तक पुर्तगाल में रही अमरीका की वेंडी वेर्नेथ कहती हैं, "लिस्बन में इलेक्ट्रिक स्कूटर किराये पर देने की शुरुआत हुई थी जो कि बहुत कामयाब है. शहर के आस-पास जाने के लिए लोगों ने इन इको-फ्रेंडली इलेक्ट्रिक स्कूटरों को अपना लिया है."

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Image caption उरुग्वे

उरुग्वेः इंडेक्स रैंकिंग 15

उरुग्वे प्लैनेट एंड क्लाइमेट इंडेक्स में सभी दक्षिण अमरीकी देशों से ऊपर है.

सामाजिक और पर्यावरण नीतियों के लिए इसे हमेशा सराहना मिली है. अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में भी यह ग्लोबल लीडर बन गया है.

उरुग्वे-अमरीकी लोला मेंडेज़ ब्लॉग लिखती हैं. वह कहती हैं, "उरुग्वे के पास कोई तेल भंडार नहीं है. हम तेल आयात पर बहुत पैसे ख़र्च करते थे. इसलिए हमने तेल-आधारित ईंधन की जगह स्वच्छ ऊर्जा को अपनाना शुरू किया. यह एक दशक से भी कम समय में पूरा हो गया."

आज यहां की लगभग 95 फ़ीसदी बिजली अक्षय ऊर्जा स्रोतों से मिलती है. इसका मुख्य हिस्सा पनबिजली का है, लेकिन इसमें सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और बायो-फ्यूल भी शामिल हैं.

मेंडेज़ कहती हैं, "2012 में उरुग्वे की सिर्फ़ 40 फ़ीसदी बिजली अक्षय स्रोतों से बनती थी, इसलिए बहुत कम समय में यह बड़ा बदलाव है."

सरकारी सब्सिडी के बिना नाटकीय बदलाव लाने की इस प्रतिबद्धता का नतीजा भी दिखा. 2015 के पेरिस समझौते में इस छोटे से देश की ओर पूरी दुनिया का ध्यान गया.

आर्थिक प्रोत्साहन से अलग यहां के निवासियों ने सदियों से जमीन से एक मज़बूत रिश्ता बनाया है.

मेंडेज़ कहती हैं, "उरुग्वे के लोग हमेशा अपनी धरती मां को प्यार और सम्मान देते रहे हैं. आदिम जनजातियों से लेकर गाय और भेड़ पालने वाले चरवाहों तक सभी को यहां की धरती ने समृद्ध किया है."

ज़्यादातर बड़े शहरों में सार्वजनिक परिवहन (ज़्यादातर बिजली से संचालित) उपलब्ध है.

कैरास्को इंटरनेशनल एयरपोर्ट लगभग पूरी तरह सौर ऊर्जा से संचालित एयरपोर्ट बनने के लक्ष्य के करीब पहुंच गया है. पूरे लैटिन अमरीका में यह ऐसा पहला एयरपोर्ट है.

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Image caption केन्या

केन्याः इंडेक्स रैंकिंग 26

केन्या में जलवायु परिवर्तन के शुरुआती असर दिखने लगे हैं. यहां मौसम में होने वाले बदलाव भयंकर हो चले हैं और पहले से भीषण सूखा पड़ने लगा है.

सरकार कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को बचाने पर काम कर रही है. उसने जलवायु परिवर्तन कार्य योजना बनाई है और 2030 तक ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन 30 फ़ीसदी कम करने का लक्ष्य रखा है.

केन्या के जलमार्गों और स्थानीय पर्यावरण को बचाने के लिए हाल ही में प्लास्टिक के थैलों पर पाबंदी लगा दी गई है. इस प्रयास से भी इंडेक्स रैंकिंग में 26वें नंबर पर पहुंचने में मदद मिली है.

केन्या का प्लास्टिक बैन सबसे सख़्त है. कोई नागरिक (या विदेशी) अगर प्लास्टिक के थैलों के साथ दिखे तो भारी जुर्माने के साथ उसके जेल जाने का भी ख़तरा रहता है.

पर्यावरण की रक्षा के लिए हमेशा सरकारी हस्तक्षेप की ज़रूरत नहीं पड़ती. नैरोबी में रहने वाले अमरीकी फाय क्यूवस कहते हैं, "स्थानीय समुदायों के पास पर्यावरण रक्षा की अपनी परंपरागत प्रणालियां हैं और वे कारगर भी हैं."

फ्यूवस इंटरनेशनल फ़ंड फ़ॉर एनिमल वेलफेयर (IFAW) के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट हैं.

वह कहते हैं, "मासई लॉइटा जंगल एक उदाहरण है. इसकी देखभाल स्वदेशी लोग करते हैं और यहां के पेड़ बस इसलिए सुरक्षित हैं क्योंकि उनकी हिफ़ाज़त के लिए स्थानीय नियम और परंपरागत व्यवस्था मौजूद है."

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धरती को बचाने के लिए आप क्या कर सकते हैं?

दक्षिणी केन्या और उत्तरी तंजानिया में रहने वाले जनजातीय समुदाय मासई के लिए परिवार और पर्यावरण को अलग नहीं किया जा सकता.

मासई जनजाति के बुजुर्ग और केन्या की दक्षिणी रिफ्ट वैली में सोरोलो कंजरवेंसी के निदेशक जॉन कामंगा कहते हैं, "जब मासई लोग मिलते हैं तो सबसे पहले पर्यावरण पर चर्चा करते हैं."

"बारिश, घास और पानी के बारे में बातें करने के बाद वे मवेशियों का हाल-चाल लेते हैं, फिर वे एक-दूसरे के परिवार के बारे में पूछताछ करते हैं."

"स्वस्थ पर्यावरण नहीं होने का मतलब है कि गाय नहीं, कोई बच्चे नहीं, पारंपरिक संस्कृति नहीं और ज़िंदगी जीने का पुराना तरीका नहीं."

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दिन-ब-दिन समंदर में समा रहा भारत का ये हिस्सा

न्यूज़ीलैंडः इंडेक्स रैंकिंग 39

जलवायु सूचकांक के आधार पर न्यूज़ीलैंड एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे आगे है.

न्यूज़ीलैंड गंभीरता से अपने प्राकृतिक संसाधनों की हिफ़ाज़त करता है, क्योंकि इसकी कृषि और पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था इसी पर टिकी है.

मूल रूप से न्यूज़ीलैंड के रहने वाले ब्रेंडन ली ब्रेन ऑन द रोड ब्लॉग लिखते हैं. वह कहते हैं, "हमारा देश दुनिया भर में क्लीन ग्रीन न्यूजीलैंड के रूप में जाना जाता है. हमारी पहचान इसी से जुड़ी है."

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Image caption न्यूज़ीलैंड

"किवी बहुत गर्व महसूस करते हैं जब यहां आने वाले पर्यटक हमसे कहते हैं कि हमारी प्रकृति बहुत सुंदर है, हमारा देश बहुत सुंदर है."

मवेशी और भेड़पालन उद्योग के कारण न्यूज़ीलैंड में मीथेन का उत्सर्जन ज़्यादा है. ऊर्जा उद्योग के बढ़ते प्रसार के कारण प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन के मामले में भी न्यूज़ीलैंड शीर्ष के देशों में शामिल है.

न्यूज़ीलैंड ने 2050 तक कार्बन न्यूट्रल बन जाने का लक्ष्य तय किया है और इसे हासिल करने के सभी राजनीतिक दलों के नेताओं का गठबंधन तैयार किया है.

न्यूज़ीलैंड का क्षेत्रफल कैलिफोर्निया के दो-तिहाई है, लेकिन यहां की आबादी कैलिफोर्निया की आबादी का 10 फ़ीसदी ही है.

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Image caption न्यूज़ीलैंड

इससे दूसरे बड़े शहरी केंद्रो के मुक़ाबले न्यूज़ीलैंड रोजमर्रा की पर्यावरणीय चिंताओं, जैसे वायु प्रदूषण या कचरे के ढेर वगैरह, से मुक्त है.

ली कहते हैं, "न्यूज़ीलैंड में ऐसा नहीं होता कि कूड़े के ढेर से प्लास्टिक उड़ रहे हों या पानी के सोते प्लास्टिक बोतलों और प्लास्टिक थैलों की वजह से बंद हो गए हों." लेकिन हाल के वर्षों में स्थिति बदल रही है.

ब्रिटेन की जेस टोंकिंग क्वींसटाउन में रहती हैं. वह टिकाऊ कपड़ों के ब्रांड सनड्राइड में काम करती हैं.

जेस कहती हैं, "सुपरमार्केट में प्लास्टिक की थैलियों को प्रतिबंधित कर दिया गया है. आपकों यहां प्लास्टिक के स्ट्रॉ नहीं दिखेंगे. लोग पीने के पानी की सुंदर और टिकाऊ बोतल लेकर चलते हैं."

"जबसे मैं न्यूज़ीलैंड में रह रही हूं मैं पर्यावरण के बारे में ज़्यादा सोचती हूं. मैं इस्तेमाल हुई चीजों का दोबारा इस्तेमाल करती हूं. मैंने पशु उत्पादों को ख़रीदना कम कर दिया है. मैं एक अधिक टिकाऊ जीवनशैली जीना चाहती हूं."

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