सबसे ख़तरनाक समुद्री रास्ते, इन पर सफ़र करना आसान नहीं

  • 13 मई 2019
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भूमंडलीकरण के इस दौर में दुनिया बेहद क़रीब आ चुकी है. एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंचने में कुछ घंटे भर लगते हैं. आवाज़ से भी तेज़ उड़ने वाले विमान आ गए हैं. तेज़ चलने वाले जहाज़ बन गए हैं, जो कुछ ही वक़्त में सफ़र पूरा कर लेते हैं.

लेकिन आज से कुछ सदी पहले ऐसा नहीं था. दुनिया के तमाम कोनों के बारे में सबको पता नहीं था. लोग, जहाज़ पर सवार होकर नई दुनिया की खोज के लिए निकल पड़ते थे. अनजान, मुश्किल रास्तों से गुज़रते थे. इसी तरह से अमरीका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड की खोज, यूरोपीय नाविकों ने की और अपने उपनिवेश बनाए.

पहले यूरोप से होकर ऑस्ट्रेलिया जाने के लिए पूरे दक्षिण अमरीका का चक्कर लगाना पड़ता था. अंटार्कटिका और दक्षिण अमरीका के बीच स्थित मैगलेन की जलसंधि होते हुए नाविक ये सफ़र पूरा करते थे.

बाद में मध्य अमरीका में पनामा नहर बनी, तो ये सफ़र छोटा हो गया. लेकिन, पनामा नहर संकरी है. बड़े जहाज़ों को आज भी मैगलेन की जलसंधि से होकर ही जाना पड़ता है.

आज से क़रीब 70 बरस पहले मेरे दादा भी ऑस्ट्रेलिया से नई ज़िंदगी की तलाश में इंग्लैंड इसी रास्ते से होकर पहुंचे थे.

मैगलेन की जलसंधि की खोज की इस साल पांच सौवीं सालगिरह मनाई जा रही है. पुर्तगाली अन्वेषक फर्डीनेंड मैगलेन ने पांच सदी पहले इस समुद्री रास्ते की खोज की थी. वो यहां से गुज़रते हुए प्रशांत महासागर स्थित द्वीपों तक पहुंचे थे.

जब मैं छोटा था, तो मेरे दादा अक्सर 1949 के अपने सफ़र के क़िस्से बताते थे. उस साल वो ऑस्ट्रेलिया से पामीर नाम के जहाज़ पर सवार होकर इंग्लैंड के लिए निकले थे. पामीर, जर्मनी का जहाज़ था और अपने चार मस्तूलों की वजह से बहुत मशहूर था. वो ऑस्ट्रेलिया के एडीलेड शहर के पोर्ट एलिज़ाबेथ बंदरगाह से इंग्लैंड के कॉर्नवाल शहर के फालमाउथ बंदरगाह के लिए रवाना हुआ था.

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पामीर में अनाज की 60 हज़ार बोरियां लदी हुई थीं. ये पामीर जहाज़ का समुद्री रास्ते ड्रेक पैसेज से होते हुए आख़िरी सफ़र था. और ये आख़िरी बार था, जब कोई कारोबारी जहाज़ दक्षिणी चिली के हॉर्न अंतरीप से होते हुए गुज़रा.

अपने दादा के उस ऐतिहासिक सफ़र को दोबारा जीने के लिए मैंने क्रूज़ लाइनर वेंटस ऑस्ट्रैलिस से दक्षिणी चिली के दुर्गम इलाक़े से गुज़रने की ठानी.

वेंटस ऑस्ट्रेलिस को चिली के दक्षिणी हिस्से पुंता अरेनास से होकर गुज़रना था, जो मैगलेन जलसंधि का हिस्सा है. चार दिन का मेरा ये सफ़र एक नए तजुर्बे के लिए था. मैं अपने दादा के उस तजुर्बे को दोबारा जीना चाहता था, जो आज से 70 साल पहले के सफ़र में उन्होंने किया था. ये सफ़र इतना रोमांचक था कि मेरे दादा जीवन के आख़िरी मौक़े तक केप हॉर्न से गुज़रने के क़िस्से बताते रहते थे.

मेरे दादा की अपने पिता से नहीं पटती थी. वो ऑस्ट्रेलिया में रहते थे. पर, इंग्लैंड जाकर नई ज़िंदगी शुरू करने के सपने देखते थे. जब पामीर कारोबारी जहाज़ से इंग्लैंड जाने का ऑफ़र मिला, तो मेरे दादा बिना किसी को बताए, इस सफ़र पर निकल पड़े. वो एडीलेड में पामीर जहाज़ पर सवार हुए थे. उन्हें इंग्लैंड के बारे में कुछ ख़ास जानकारी नहीं थी. बस लोगों से सुना भर था कि वहां की ज़िंदगी बेहतरीन है.

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पामीर पर वो 33 दूसरे लोगों के साथ चालक दल का हिस्सा थे. मेरे दादा को सफ़र के दौरान 18 घंटे तक काम करना पड़ता था. वो ज़्यादातर किचेन से लेकर डेक तक की सफ़ाई करते थे. सफ़र 128 दिन लंबा था. लेकिन, मेरे दादा एक बार इंग्लैंड पहुंचे, तो दोबारा घर नहीं गए. कॉर्नवाल में जहाज़ से उतरकर वो ग्रामीण इलाक़े में चले गए. इसके बाद वो अगले 54 साल तक यानी 2003 में अपनी मौत तक वहीं रहे.

मेरे दादा के लिए इस सफ़र की सबसे यादगार बात रही टिएरा डेल फ्यूगो के द्वीप समूह देखना थी. ये द्वीप, मैगलेन जलसंधि को समुद्र के भयंकर थपेड़ों से बचाते थे. दक्षिणी चिली में अंटार्कटिका से आने वाली भयंकर बर्फ़ीली हवाए क़हर बरपाती हैं. सांस लेने पर मालूम होता है कि बर्फ़ आप के फेफड़ों में घुस गई है.

पुंता अरेनास शहर के मुख्य चौराहे प्लाज़े डे अरमास में फर्डीनेंड मैगलेन का बुत लगा हुआ है. मैगलेन ने 1520 में यहां से गुज़रते हुए प्रशांत महासागर का रास्ता खोजा था. यहां से गुज़रने वाले नाविक आज भी फर्डीनेंड मैगलेन के बुत के पांव छूते हैं.

मैगलेन के इस रास्ते को तलाशने के बाद अगले 400 साल तक ये अटलांटिक और प्रशांत महासागर के बीच का प्रमुख रास्ता रहा था.

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Image caption इस लेख को लिखने वाले लेखक जेम्स क्लार्क

मैगलेन की जलसंधि के रास्ते में कई द्वीप और मुहाने पड़ते हैं. 600 किलोमीटर लंबे रास्ते से गुज़रना इतना आसान नहीं है. फिर भी, नाविकों के लिए, केप हॉर्न से होकर जाने के बजाय मैगलेन जलसंधि से गुज़रना आसान था. क्योंकि केप हॉर्न वाले रास्ते से जाने पर भयंकर कहे जाने वाले ड्रेक पैसेज से गुज़रना पड़ता था. ये समुद्री रास्ता, अंटार्कटिका के साउथ शेटलैंड द्वीपों और केप हॉर्न को अलग करता है.

1914 में मध्य अमरीका को काटकर बनी पनामा नहर ने अटलांटिक और प्रशांत महासागर के बीच दूरी कम कर दी. मैगलेन जलसंधि से जहाज़ों का गुज़रना कमोबेश बंद ही हो गया.

पर, ऑस्ट्रेलिया से आने वाले जहाज़ों के लिए पनामा नहर के पश्चिमी हिस्से से प्रवेश करना मुश्किल होता था. पामीर जैसे बड़े जहाज़ों के लिए ये और भी मुश्किल होता था. इसी वजह से मेरे दादाजी के जहाज़ को पूरे दक्षिण अमरीका का चक्कर लगाकर अटलांटिक महासागर में आना पड़ा. वो किसी कारोबारी जहाज़ का मैगलेन जलसंधि से गुज़रने का आख़िरी सफ़र था. मेरे दादा को इस पर बहुत फ़ख़्र था.

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पुंता अरेनास से दूर होते ही परछाइयां भी साथ छोड़ देती हैं. गहरे अंधेरे रास्ते डराने लगते हैं. सर्द हवाओं के थपेड़े शरीर को जमा देते हैं. यहां से पास ही पड़ने वाले अंटार्कटिका की सैर के लिए छोटी नाव पर सवार होकर जाया जा सकता है. यहां आप को सफ़ेद चमकते ग्लेशियर के दीदार होते हैं.

ऐंसवर्थ की खाड़ी से गुज़रने पर भयंकर सन्नाटे से सामना होता है. इसे पैटागोनिया मोमेंट के नाम से जाना जाता है.

यहीं पास में आप को टकर द्वीप पर मैगलेन पेंगुइन दिखते हैं. यहां के परिंदे बहुत बदबू करते हैं.

चिली के इस कोने से अंटार्कटिका इतनी ही दूरी पर है जैसे हाथ पकड़ कर क़रीब की किसी चीज़ को छू लेना. चिली के इस सुदूर इलाक़े में स्थित पिया ग्लेशियर बहुत मशहूर है. मेरे दादा यहां से गुज़रने के तजुर्बे को बहुत चाव से बताते थे. वो कहते थे कि पहाड़ों के बीच बर्फ़ के टुकड़े तैर रहे थे. ये मंज़र याद कर के मेरे दादा कहते थे कि वो दूसरी दुनिया का लगता था. मेरे दादा को अपने जीवन में बहुत बाद में जाकर पता चला कि उस तैरती बर्फ़ को असल में ग्लेशियर कहते हैं.

पिया ग्लेशियर कभी चौदह वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ था. पर अब ये सिकुड़ कर महज़ सात वर्ग किलोमीटर का रह गया है. जब मैं पास ही टहल रहा था तो ग्लेशियर से टूटकर समंदर में मिलती बर्फ़ की आवाज़ साफ़ सुनाई दे रही थी.

बर्फ़ के तैरते टुकड़ों से गुज़रते हुए मेरे जहाज़ के क़रीब से एक व्हेल गुज़री तो मेरी निगाह बरबस उस पर पड़ी. कई डॉल्फ़िन भी शोर मचाती हुई गुज़रीं.

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70 साल पहले जब मेरे दादा का जहाज़ यहां से गुज़रा था, तो उन्होंने दस मंज़िला ऊंची लहरों को उठते हुए देखा था. इनकी ताक़त से सैकड़ों जहाज़ समुद्र में डूब गए थे. चार्ल्स डार्विन, हर्मन मेलविल और जूल्स वर्न भी यहां से होकर गुज़रे थे. उन सभी महान हस्तियों ने यहां के ख़तरनाक तजुर्बे के बारे में लिखा है.

हमारा जहाज़ सुबह 4.30 बजे ड्रेक पैसेज से गुज़र रहा था. समंदर के थपेड़े इतने तेज़ थे कि मुझे नींद में भी पता चल गया, जबकि मेरे दादा जी के जहाज़ के मुक़ाबले मेरा क्रूज़ लाइनर मज़बूत और भारी था.

ख़राब मौसम की वजह से अक्सर जहाज़ केप हॉर्न पर नहीं रुक पाते. मेरे दादा का जहाज़ जब केप हॉर्न के क़रीब था, तो वो और उनके साथी डेक से बर्फ़ हटा रहे थे.

मेरा क्रूज़ लाइनर जब केप हॉर्न पर रुका, तो बारिश, ओलों और सर्द हवाओं से मेरा स्वागत किया गया. मैं जहाज़ से उतर कर वहां बने लाइट हाउस और चर्च को देखने गया. वहां से गुज़रे उन हज़ारों नाविकों की याद में एक विशाल प्रतिमा भी बनाई गई है, जिनकी मिशन के दौरान मौत हो गई.

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मेरे दादा का जहाज़ पामीर, केप हॉर्न पर नहीं रुक पाया था. पर उन्हें वो शैतानी चट्टानों वाला द्वीप हमेशा याद रहा. वो कहते थे कि 'मुझ से पहले सैकड़ों लोग वहां पर गुज़रते हुए जान गवां चुके थे.'

उस द्वीप पर खड़े होकर मुझे अपने दादा की बहुत याद आ रही थी. वो अगर ज़िंदा होते, तो मेरे सफ़र के बारे में क्या कहते, ये ख़याल ही मुझे रोमांचित कर रहा था.

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