हिटलर को हराने की योजना वाली वो गुप्त मीटिंग

  • 12 जून 2019
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दक्षिण-पश्चिमी स्कॉटलैंड की गैलोवे पहाड़ियों को यहां के जंगलों, घाटियों और झीलों के लिए जाना जाता है.

लेकिन रॉयल एयर फोर्स के पूर्व पायलट और बारूद कारखाने के पूर्व इंजीनियर 81 साल के मॉरिस सर्विस को यहां के जर्रे-जर्रे में इतिहास दिखता है.

बचपन में क्रिफेल की तलहटी में टहलते हुए वह अपने पिता से बॉम्बर्स और स्पिटफायर्स की कहानियां सुनते थे.

पिता के साथ उन्होंने युद्ध में गिरे विमानों के मलबे देखे थे. उनमें एलबी-30 लिबरेटर्स, डि हेवीलैंड डीएच.98 मॉस्किटोज और दो इंजन वाले एंसन विमानों के मलबे शामिल थे.

इनमें से ज़्यादातर विमान हवा में लड़खड़ा गए थे या रॉयल एयरफोर्स के किसी स्टेशन से उड़ान भरने के बाद हादसे का शिकार हो गए थे.

एक छोटे बच्चे के लिए यह एविएशन हिस्ट्री का सबक था. मॉरिस तभी से दूसरे विश्व युद्ध के रहस्यों का पता लगाने में जुटे हैं.

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सैन्य इतिहास

आज भी वह स्टेशन रिकॉर्ड्स की छानबीन करते हैं, जिनमें उनकी अपनी काउंटी डम्फ्रीज और गैलोवे में सैन्यकर्मियों के आने-जाने के ब्योरे दर्ज हैं.

वह 400 से ज़्यादा हवाई हादसों की छोटी से छोटी बातें जानते हैं, जो पायलट, गनर और नाविकों की ट्रेनिंग के दौरान हुए थे.

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लेकिन एक असामान्य रहस्य अब भी उनके लिए जुनून बना हुआ है. इस कहानी के दो किरदार पिछली सदी की दो सबसे अहम और प्रभावशाली शख्सियतें हैं.

स्थानीय लोगों के मुताबिक़ वे गैलोवे प्रायद्वीप के राइन में दूर बने एक शानदार लॉज में मिले थे. नॉकिनैम लॉज के पिछले मालिकों के मुताबिक़ उनके मिलने की कहानी सच्ची है.

उनके नाम थे- विंस्टन लियोनार्ड स्पेंसर चर्चिल और ड्वाइट डेविड आइजनहावर. ये नाम किसी गेस्ट बुक में नहीं मिलते.

कहा जाता है कि ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री और अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति, जो युद्धकाल में अपनी-अपनी सेना के कमांडिंग जनरल थे, वे लॉज के सबसे अगले कमरे में मिले थे.

वहां चाय पीते हुए उन्होंने नॉरमैंडी पर आक्रमण की योजना बनाई थी, मतलब यही वह जगह थी जहां डी-डे हक़ीक़त बना.

हिटलर को हराने का प्लान

उस मुलाकात ने अब तक की सबसे हिंसक लड़ाई का अंजाम तय किया था.

डी-डे का आक्रमण इतना सफल रहा कि उसने जर्मनी के संसाधनों को सोख लिया और आख़िर में पश्चिमी यूरोप को (हिटलर से) मुक्त करा लिया गया.

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डम्फ्रीज के शॉपिंग सेंटर में लंच के समय मैं मॉरिस से मिला. मैं भी वह कहानी जानना चाहता था. मेरे दादा भी दूसरे विश्वयुद्ध में लड़े थे.

स्थानीय लोगों की रुचि ब्रेक्सिट और यूरोपीय संघ की आगामी बैठक में है, लेकिन सैन्य इतिहासकार और मेरे पास दूसरा काम था- हम अतीत की यात्रा करके मई 1944 में जाने वाले थे.

मॉरिस ने इतिहास की वे सारी किताबें पढ़ी हैं जिनमें दूसरे विश्व युद्ध में डम्फ्रीज और गैलोवे में घटित सभी गोपनीय घटनाओं का जिक्र है.

लेकिन उनमें चर्चिल और आइजनहावर की मुलाक़ात का कोई ज़िक्र नहीं है. यही बात उनको परेशान करती है.

मॉरिस सर्विस के दादा पहले विश्व युद्ध में लेफ़्टिनेंट कर्नल थे और पिता ने दूसरे विश्व युद्ध में रॉयल नेवी में काम किया था.

सूत्र की तलाश

चर्चिल और आइजनहावर की मुलाकात का कोई भी सूत्र तलाशने के लिए इसी साल उन्होंने 16 किताबें पढ़ डाली हैं.

हाल ही में उन्हें 'बेओनेट' के विशेष लॉग-बुक की कॉपी मिली है. यह वह गोपनीय ट्रेन कार थी जिसमें आइजनहावर ने ब्रिटेन की गुप्त यात्रा की थी.

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जिस दिन हम मिले उससे एक दिन पहले ही उन्हें अबिलीन, कंसास की आइजनहावर प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी से एक पत्र मिला.

उन्होंने प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी से यह जानने की कोशिश की थी कि उनके व्यापक संग्रह में कहीं भी नॉकिनैम लॉज का जिक्र है या नहीं.

वह कहते हैं, "उस जगह पर सुराग बिखरे पड़े हैं. चर्चिल सी-प्लेन से नॉकिनैम आए थे और दो रात रहे थे. इस बात की पुष्टि उन लोगों ने की है जो उस समय जीवित थे."

"आइजनहावर विमान से टर्नबेरी (स्कॉटलैंड) आए थे. यह बस संयोग नहीं हो सकता."

आजकल लोग युद्ध की जगहों पर तीर्थयात्रा करते हैं. बेल्जियम के आर्डेनेस, नीदरलैंड में अर्नहेम के जॉन फ्रॉस्ट ब्रिज़, पोलैंड के ऑशविट्ज़-बिर्केनाउ और लंदन के कैबिनेट वॉर रूम में लोगों की भीड़ उमड़ती है.

वे नॉरमैंडी के स्वोर्ड, जुनो, गोल्ड, ओमाहा और उटाह तटों पर जाते हैं, जहां 6 जून 1944 को मित्र देशों की सेना उतरी थी.

आइजनहावर क्यों आए थे?

डम्फ्रीज और गैलोवे दूसरे विश्व-युद्ध में जंग के मैदान से दूर थे, लेकिन युद्ध इतिहास में रुचि रखने वाले विद्वान नॉकिनैम भी पहुंचते हैं.

मॉरिस सर्विस उस एकांत लॉज में हुई मुलाक़ात की पुष्टि करने के लिए डी-डे से पहले के एक और अहम बात की ओर संकेत करते हैं.

मुलाक़ात की जगह से कुछ ही मील की दूरी पर रॉयल एयर फोर्स का पश्चिमी फ्रीग कैंप था. वहां आयुध प्रशिक्षण कैंप था जो बॉम्बिंग ट्रायल यूनिट के बेस के तौर पर काम करता था.

पास ही केयर्नियन में आपातकाल के लिए एक गुप्त सैन्य बंदरगाह भी बनाया गया था. ये दोनों उनकी मुलाक़ात के लिए पर्याप्त कारण हैं.

रिकॉर्ड्स के मुताबिक आइजनहावर जनवरी 1944 में ग्लासगो प्रेस्टविक एयरपोर्ट आए थे, लेकिन इस यात्रा की वजह का कोई उल्लेख नहीं है.

अप्रैल में वे सैनिकों का मनोबल बढ़ाने और एबर्डिनशायर के बैंचुरी में फ़्लाई फिशिंग छुट्टियों का आनंद लेने के लिए फिर आए थे.

चर्चिल की पसंदीदा जगह

चर्चिल ऑर-इविंग परिवार के मित्र थे, जो पहले नॉकिनैम लॉज के मालिक थे. वास्तव में चर्चिल के परिवार के एक सदस्य की शादी उस परिवार में हुई थी.

एकांत में होने के कारण यह लॉज चर्चिल को पसंद था. कहा जाता है कि यहां के बाथरूम में उन्होंने हाउस ऑफ़ कॉमन्स में दिए जाने वाले भाषणों का अभ्यास किया था.

नॉकिनैम में मुलाकात का एक और कारण पास का मर्लबेरी हार्बर था. विगटाउनशायर तट पर समुद्र का यह किनारा भी डी-डे के एक अन्य बड़े रहस्य को छिपाए हुए है.

यहां के गैर्लिएस्टन गांव के तट पर ही पानी में तैरने वाले अस्थायी बंदरगाहों को बनाया गया और उनका परीक्षण किया गया था. उनको मर्लबेरी उपनाम दिया गया था.

इन अस्थायी बंदरगाहों को खींचकर फ़्रांस पहुंचाया गया था और नॉरमैंडी युद्ध से पहले मित्र देशों की सेना, उनकी गाड़ियां और रसद उन्हीं पर उतरी थी.

क्या चर्चिल और आइजनहावर ने गुप्त मुलाक़ात के दौरान इनका निरीक्षण किया था?

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मॉरिस का कहना है कि गैर्लिएस्टन के गोपनीय रहस्य को देखते लॉज में मुलाक़ात एकदम सही लगती है.

"चर्चिल के बारे में यह भी कहा जाता है कि उन्होंने मर्लबेरी हार्बर के निर्माण के दौरान उनका निरीक्षण किया था."

हालांकि इसके दस्तावेजी प्रमाण नहीं हैं, लेकिन घटनाओं का एक और संस्करण है जिसके मुताबिक चर्चिल और आइजनहावर 'रैटल' के बाद मिले थे.

'रैटल' एक गुप्त युद्धकालीन सम्मेलन था जो डी-डे से एक साल पहले लार्ग्स में हुआ था.

लंदन से ध्यान को दूर करने के लिए संयुक्त सैन्य अभियानों के प्रमुख लॉर्ड लुइस माउंटबेटन ने उत्तर में एक मिलिट्री सर्कस आयोजित किया था. चर्चिल और आइजनहावर दोनों वहां मौजूद थे.

स्कॉटलैंड के एक दूसरे होटल का भी दावा है कि इतिहास बदलने वाली मीटिंग उसके यहां हुई थी.

1944 में विंस्टन चर्चिल बैलेनट्रे के पास ग्लेनप कैसल में रुके थे. होटल के मालिकों का दावा है कि इसी जगह पर नॉरमैंडी लैंडिंग पर विचार किया गया था.

समुद्र का किनारा

नॉकिनैम लॉज जाने के लिए मैंने पूर्व की यात्रा की शुरू की. मैं हिरणों और तीतरों की आबादी के बीच से होता हुआ वहां तक पहुंचा जहां आइरिश सागर के पास स्कॉटलैंड की सीमा ख़त्म होती है.

आज नॉकिनैम किसी ऐतिहासिक युद्ध-थ्रिलर (फ़िल्म) के सेट की तरह लगता है.

काउंटी के टेढ़े-मेढ़े रास्ते समुद्र तट की ओर जाते हैं. वहां 1869 में बनी पत्थर की एक इमारत के अलावा दूसरी कोई इमारत नहीं दिखती.

सामने के दरवाजे से नीले रंग की एक पट्टिका दिखती है जो एक पूर्व लेफ्टिनेंट कमांडर और युद्ध के नायक को समर्पित है.

आगे जाने पर कई रहस्यमय चीजें दिखती हैं. इस लॉज को समुद्र की तरफ से छिपाने की कोशिश की गई थी.

विश्वास करना कठिन है कि यहां के शांत पानी में कभी पनडुब्बियां गश्त करती थीं.

अंदर जाने पर दूसरे विश्व युद्ध के सभी निशान गायब हो जाते हैं. 10 बिस्तरों वाले इस लॉज में स्कॉटिश तड़क-भड़क है, जिसमें इतिहास भी है और आधुनिकता भी.

चर्चिल सुइट, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री कभी रुके थे, में 20वीं सदी के मध्य के फर्नीचर हैं. इसकी सजावट भी वैसी ही है. 1944 में यह सुइट शायद ऐसा ही दिखता होगा.

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पिछले 16 साल से इस संपत्ति का प्रबंधन कर रहे डेविड इबॉटसन कहते हैं, "जैसे-जैसे समय बीतता है, बहुत कम लोगों को यह याद रहता है कि यहां मीटिंग हुई थी या नहीं."

"पूर्व मालिकों के बेटे एडी ऑर-इविंग ने मुझे बताया था कि वे निश्चित रूप से यहां रुके थे. लेकिन वह अब 88 साल के हैं और उनकी याददाश्त अब भरोसे के लायक नहीं है."

"ऑर-इविंग के पिता हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स में लिबरल लीडर थे, इसलिए वह निश्चित रूप से चर्चिल को जानते थे और उनको यहां रुकने के लिए बुलाया था."

लॉज मालिकों ने बताई कहानी

इबॉटसन इस बात से आश्वस्त नहीं हैं कि यह कहानी सच है या झूठ- लेकिन उनके पिछले मालिकों ने यही कहानी बताई थी.

1973 में होटल के रूप में बदलने से पहले इस निजी संपत्ति का इस्तेमाल एक सैन्य अस्पताल के रूप में किया गया था, जहां घायलों का इलाज होता था.

हर जगह से ऐसी दर्दनाक यादें जुड़ी नहीं होतीं. लेकिन स्थानीय लोगों को दूसरे विश्व युद्ध में उनकी काउंटी की भूमिका पर गर्व है.

6 जून को डी-डे की वर्षगांठ मनाई गई तो चर्चिल और आइजनहावर की गुप्त मुलाक़ात की भी चर्चा हुई.

उस मुलाक़ात के दोनों हीरो यहां के लोगों के ज़हन में बसे हुए हैं. उनके लिए इस बात में कोई शंका नहीं कि वह मुलाकात हुई थी.

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