वो वियतनाम जिसे आपने नहीं देखा होगा

  • 19 जून 2019
वियतनाम के अनदेखे चेहरे इमेज कॉपीरइट instagram/rehahn_photography

ट्रैवेल फोटोग्राफर रेहान पिछले 8 साल से वियतनाम के 54 मान्यता प्राप्त नस्लीय समूहों के लोगों की तस्वीरें उतार रहे हैं.

मूल रूप से फ्रांस के नॉरमैंडी के रहने वाले रेहान 2011 से वियतनाम के शहर होई एन में रह रहे हैं.

उनका कहना है कि जब वह पिता बने तब 'विरासत' शब्द के बारे में गहराई से सोचना शुरू किया.

"सभी माता-पिता की तरह मैंने ख़ुद से पूछा कि मेरे बच्चे मुझसे क्या सीखेंगे. मैं उन्हें विरासत में क्या दे सकता हूं."

महत्वाकांक्षी परियोजना

रेहान अनमोल धरोहर परियोजना पर काम कर रहे हैं. इसमें वह वियतनाम के उन 54 नस्लीय समूहों के सदस्यों की तस्वीरें खींच रहे हैं जिनको सरकार ने मान्यता दी है.

वह कहते हैं, "पिता बनने के बाद जब मैं ख़ुद के सवालों के जवाब तलाश रहा था, उन दिनों मैं ट्रैवेल पोट्रेट फोटोग्राफर के रूप में पूरे वियतनाम की यात्रा कर रहा था."

"मैं विभिन्न संस्कृतियों से ताल्लुक रखने वाले लोगों से मिला, जिनको दुख है कि उनके बच्चे उनकी भाषा या हस्तशिल्प को नहीं सीख रहे."

"इन आदिवासी समूहों के बारे में मैंने जितनी खोजबीन की, उतना ही मुझे अहसास हुआ कि विरासत कितनी क्षणभंगुर हो सकती है."

"अलिखित भाषाओं को यदि कोई न बोले तो वे ज़िंदा नहीं रह सकतीं. जो गीत गाए नहीं जाते, वे भुला दिए जाते हैं."

"मुझे लगा कि इस अनमोल विरासत को ज़िंदा रखने की कोशिश करना कितना महत्वपूर्ण है."

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आख़िरी नस्लीय समूह

रेहान को उम्मीद है कि इसी साल वह वियतनाम के आख़िरी नस्लीय समूह 'चुट' के सदस्यों से मिलेंगे और उनकी तस्वीरें खींचेंगे.

लेकिन वियतनाम के नस्लीय समूहों की संख्या सरकार द्वारा पंजीकृत 54 समूहों से ज़्यादा है.

हाल ही में पा थेन नस्लीय समूह से मिलने के लिए वह उत्तरी वियतनाम के तुयेन क्वांग प्रांत के दौरे पर गए तो उनकी मुलाकात थुये समूह के सदस्यों से हुई.

सरकार ने आधिकारिक तौर पर इस समूह को मान्यता नहीं दी है.

रेहान कहते हैं, "अनमोल धरोहर परियोजना कभी ख़त्म नहीं होगी. 54 पंजीकृत नस्लीय समूहों की तस्वीर उतारने का पहला लक्ष्य मैं जल्द ही पूरा कर लूंगा, लेकिन कई नस्लीय समूहों में कई उप-समूह हैं, जिनको सूची में शामिल नहीं किया गया है."

"अपनी यात्रा के दौरान मैंने कई दोस्त बनाए और कई परिवारों से जुड़ा. मैं उनसे मिलना-जुलना सिर्फ़ इसलिए बंद नहीं करूंगा क्योंकि मेरा शुरुआती काम ख़त्म हो गया है."

"मैं उनकी तस्वीरें खींचता रहूंगा, कलाकृतियां और परिधान इकट्ठा करता रहूंगा. पिछले 8 साल में जिन लोगों से मिलने का सम्मान मुझे मिला है उनसे अपने रिश्ते बनाए रखूंगा."

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विविधता से भरा देश

वियतनाम आने से पहले रेहान ने सोचा भी नहीं था कि किसी एक देश में इतनी भाषाएं, इतनी परंपराएं और एक साथ इतनी अलग-अलग सांस्कृतिक पहचान होगी.

वह कहते हैं, "मैं मानवजाति विज्ञानी नहीं हूं, लेकिन निजी तौर पर मैं मानता हूं कि दुनिया भर के इन स्वदेशी समूहों से बहुत कुछ सीखा जा सकता है."

"ये समृद्ध और पुरानी संस्कृतियां सम्मान की हकदार हैं. कम से कम उनको अपने तरीके से शांतिपूर्ण ज़िंदगी जीने का हक मिलना चाहिए."

यहां पेश है अनमोल धरोहर परियोजना में रेहान की कुछ पसंदीदा तस्वीरें. साथ ही वियतनाम के नस्लीय समूहों के सदस्यों से मुलाकात और उनकी तस्वीर खींचने से जुड़ी उनकी यादें.

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चाम

"जब मैं पहली बार अन फुओक से मिला था, तब वह केवल सात साल की थी. पिछले कुछ साल में खींची गई मेरी तस्वीरों की बदौलत नीली आंखों वाली वह लड़की आज वियतनाम की सबसे ज़्यादा चर्चित चेहरों में से एक है."

अन फुओक का जातीय समूह दक्षिणी वियतनाम के बिन्ह थुआन प्रांत में और उसके आसपास रहता है. पहले इस प्रांत को चंपा के नाम से जाना जाता था.

चाम नामक देसी समूह वियतनाम के इस हिस्से के मूल निवासी हैं.

"यह फोटो मेरे लिए बहुत निजी है क्योंकि इससे वापसी में कुछ देने की प्रेरणा मिली. मैं हमेशा कोशिश करता हूं कि मैं जिनकी तस्वीर खींचूं उनको वापस कुछ दूं."

"मैंने कई बच्चों की शिक्षा के लिए फंड देने में मदद की है. मैंने जिनकी फोटो खींची है उनके लिए नावें, गायें और कैमरे खरीदे हैं, इलाज के पैसे दिए हैं या उनके घर की मरम्मत कराई है. मुझे लगता है कि मैं जिनकी तस्वीर खींचूं उनको वापस कुछ देना महत्वपूर्ण है."

"मैं अन फुओक, उसकी बहन और परिवार से कई बार मिला हूं. अब मैं दोनों बहनों की पढ़ाई का ख़र्च उठा रहा हूं जिससे उनको जीवन के वे सभी अवसर मिल सकें जिनके वे हकदार हैं."

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शिन्ह-मुन

"उत्तरी वियतनाम की शिन्ह-मुन जनजाति की मैडम वी थी इन्ह का जन्म 1916 में हुआ था. वह 103 साल की हैं. जब मैं उनसे मिला तो वह अपने लिए और अपने पोते के लिए खाना बना रही थीं."

"उन्होंने मुझे देखा तो कहा- अंदर आ जाओ. वह एक विदेशी से मुलाकात के प्रति उत्साहित थीं."

"लाओस की सीमा पर घने जंगल में बसा यह ख़ूबसूरत गांव मुझे बहुत पसंद है."

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ब्लैक हमोंग

"2012 के बाद मैं कम से कम 10 बार उत्तरी वियतनाम में सापा की पहाड़ियों के पास रहने वाले हमोंग से मिला हूं."

"इस जनजाति के कई उप-समूह हैं. इस तस्वीर में दिख रही महिला लो थी सी ब्लैक हमोंग उप-समूह की है."

"सभी उप-समूहों के लोग कपड़े बनाने में माहिर हैं. हमोंग लड़कियां सात साल की उम्र से ही अपनी पोशाक तैयार करना सीखती हैं."

"कपड़े जूट के रेशों से बनाए जाते हैं, फिर नील से उनको रंगा जाता है और अंत में कई घंटे कढ़ाई की जाती है."

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लाओ

"95 साल की मैडम लो थी बान्ह मेरी पसंदीदा मॉडल में से एक थी. सिगार पीते हुए फोटो खिंचवाने के विचार पर वह हंस पड़ी थी."

"अपनी पीढ़ी की अन्य महिलाओं की तरह उन्होंने चांदी के छोटे झुमके पहने."

"लाओ जनजाति लाओस से निकलती है और आज भी लाओतियन भाषा का एक रूप बोलती है. हालांकि समय के साथ उनकी संस्कृति और कपड़े बदल गए हैं."

"फोटो खींचने के लिए मैं जिस गांव (ना सांग 1) में गया था, वहां अब भी परंपरागत लाओ फ़ैशन की पोशाक बनाई जाती है."

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ब्लैक लो लो

"2013 में ब्लैक लो लो जनजातीय समुदाय से मेरी पहली मुलाकात मुझे उत्तरी वियतनाम के काओ बांग प्रांत के बाओ लाक ले गई."

"वहां मैंने कई महिलाओं को परंपरागत कपड़े पहने हुए देखा था. दो साल बाद मैंने महसूस किया कि वहां बहुत कम लोग उन कपड़ों को पहनते हैं."

"75 साल की का थी नान्ह इस तस्वीर में फटे पुराने मगर ख़ूबसूरत परंपरागत पोशाक में दिख रही हैं हैं. वह बता रही हैं कि पुरानी परंपराओं को भुलाया जा रहा है."

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पा थेन

उत्तरी वियतनाम के तुयेन क्वांग प्रांत में पा थेन समुदाय के बच्चे हर सोमवार स्कूल में परंपरागत पोशाक पहनते हैं ताकि उनकी सांस्कृतिक पहचान ज़िंदा रहे.

"इस तस्वीर में 8 साल की लड़की शिन थी हुआंग अपनी ड्रेस को लेकर बहुत खुश दिख रही है."

"मैंने पहले जो देखा था, उसकी तुलना में ना न्हे के पा थेन गांव की संस्कृति विविधताओं से भरी है. शायद इसीलिए क्योंकि यहां के बच्चे नियमित रूप से परंपरागत पोशाक पहनते हैं."

"मुझे लगता है कि यह उनकी विरासत को बचाने में बहुत सहायक है."

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क्हो

"वे को-हो या क्हो के नाम से जाने जाते हैं. वे मूल रूप से वियतनाम के मध्य पहाड़ी क्षेत्र के लम दोंग प्रांत के हैं."

"यह तस्वीर के'लॉन्ग के नाम की एक महिला की है. वह 101 साल की थी. उनके 11 बच्चे और 165 नाती-पोते और परनाती-परपोते हैं."

"वह को-हो समूह के लोगों के लिए अतीत और भविष्य की जीता-जागती कड़ी थी."

"जब उनका निधन हो गया तो उनके परिवार ने हाथ से बुना उनका कंबल मुझे दिया ताकि उसे म्यूजियम में उनकी तस्वीर के पास लगाया जा सके."

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लु

"उत्तरी वियतनाम के लाइ चाउ क्षेत्र में रहने वाले लु जनजातीय समूह की लो वैन बाउ से जब मैंने फोटो खिंचवाने को कहा तो वह हैरान रह गई थी."

"उन्होंने पूछा था कि मैं तब क्यों नहीं आया जब वह जवान थीं और ख़ूबसूरत दिखती थीं."

"उनके शब्दों ने मुझे एज़लेस ब्यूटी सीरीज़ शुरू करने के लिए प्रेरित किया. मैंने वियतनाम के बुजुर्गों की तस्वीरें खींची, क्योंकि जो ख़ूबसूरती उनके लिए अदृश्य थी वह मेरे सामने स्पष्ट थी."

"उनका गांव नाम टाम अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए हुए है. इसके लिए इकोटूरिज्म का सहारा लिया गया है. मैं जहां भी गया हूं, उनमें यह गांव सबसे ख़ूबसूरत और सबसे बेहतर तरीके से संरक्षित है."

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रेड दाओ

"मैं रेड दाओ समूह की ली लो मे की इस तस्वीर को ख़ास तौर पर पसंद करता हूं. उनकी गरिमा उनकी पोशाक से भी झलकती है."

"दाओ समूह की समृद्ध पोशाक परंपराओं ने भी मुझे अनमोल धरोहर परियोजना शुरू करने के लिए प्रेरित किया था."

"मैं इस समूह के 9 स्थानीय उप-समूहों की खोजबीन जारी रखूंगा और होइ एन के अपने संग्रहालय में उनकी कहानियों को शामिल करता रहूंगा."

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शो-दांग

"ए डिप 76 साल के हैं. वह वियतनाम के मध्य पहाड़ी क्षेत्र में कोन टुम से 50 किलोमीटर दूर रहते हैं."

"वह टू द्रा नस्लीय समूह के हैं, जो असल में शो-दांग समूह का एक उप-समूह है."

"पिछले दो साल में मैं जिनसे भी मिला, उनमें ए डिप से मुलाकात सबसे बढ़िया रही. 2018 में जब मैं आख़िरी बार उनसे मिला तो मैंने उनकी कई खूबियों के बारे में जाना."

"वह अपने गांव के अकेले ऐसे कलाकार हैं जो आज भी बांस की परंपरागत टोकरियां बनाते हैं. वह टू द्रा लोगों के परंपरागत वाद्य बजाने वाले आख़िरी शख्स भी हैं."

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ब्लैक हा न्ही

"89 साल की पु लो मा और उनकी 60 साल की बेटी ब्लैक हा न्ही नस्लीय समूह की हैं."

"मैं उनसे 2017 में तब मिला था जब मैं लाई चाऊ और लाओ काई प्रांतों की यात्रा कर रहा था."

"मैं ब्लैक हा न्ही समूह की काली पोशाकों की गहनता से प्रभावित था, जिनको बनाने में 6 महीने तक लग जाते थे."

"बालों के साथ गूंथी जाने वाली उनकी बड़ी काली चोटी इंसान के असली बालों से बनाई जाती है."

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