वियतनाम में ज़मीन के नीचे गुफाओं का अनोखा संसार

  • 14 जुलाई 2019
वियतनाम में गुफा इमेज कॉपीरइट Kim I Mott

मध्य वियतनाम के क्वांग बिन्ह प्रांत की गुफाएं इतनी बड़ी हैं कि उनमें 40 मंजिला इमारत खड़ी हो जाए. दुनिया की चार सबसे बड़ी गुफाओं में से तीन गुफाएं यहीं हैं.

चूना-पत्थर की सैकड़ों अन्य गुफाएं भी हैं, जिनमें गहरी खाइयां और भूमिगत नदियां हैं. हर साल नई गुफाओं का भी पता चल रहा है.

उत्तरी और दक्षिणी वियतनाम के बीच 1954 से 1975 के बीच रहे असैन्यीकृत क्षेत्र के ठीक उत्तर में स्थित इस क्षेत्र के लिए ये अच्छी ख़बर है.

अद्भुत संसार

वियतनाम युद्ध के दौरान अमरीका ने यहां भारी बमबारी की थी. उसके बाद एक दशक तक यहां घोर गरीबी रही.

गुफाओं में घूमने के शौकीनों के लिए क्वांग बिन्ह पसंदीदा जगह है. यूनेस्को ने यहां के 1,26,000 हेक्टयर में फैले नेशनल पार्क को संरक्षित घोषित किया है.

नेशनल पार्क के घने जंगलों के नीचे 104 किलोमीटर की भूमिगत दुनिया है जो धरती पर चूने-पत्थर के पारिस्थितिकी तंत्र का सबसे शानदार नमूना है.

वियतनाम की कुछ बड़ी गुफाओं को देखने के लिए मैं वहां गया. इनमें से एक गुफा को कुछ महीने पहले ही आम लोगों के लिए खोला गया था.

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1990 के दशक में जब मैं यहां रहता था तब मुझे पता नहीं था कि मेरे पैरों के नीचे यहां की भूमिगत भूलभुलैया दबी हुई है.

गुफाओं में जाने का मेरा पहले भी अनुभव रहा है. लेकिन वे ऐसी गुफाएं थीं जिनमें घुसने पर सिर से पत्थर टकराते थे. अब मैं विशाल गुफाओं की तलाश कर रहा था.

सबसे बड़ी गुफा

क्वांग बिन्ह की गुफाओं में सबसे ज़्यादा सुर्खियां मिली हैं 200 मीटर ऊंची और 5 किलोमीटर लंबी सोन दुंग गुफा को. यह दुनिया की सबसे बड़ी गुफा है.

1991 में एक स्थानीय लकड़हारे ने इसका पता लगाया था. 2009 में वैज्ञानिकों ने इसकी खोजबीन की और 2013 में इसे सैलानियों के लिए खोला गया.

यहां साल में 1,000 सैलानियों को ही आने की अनुमति मिलती है जिसका ख़र्च होता है 6,97,66,100 वियतनामी दोंग (प्रति व्यक्ति 2,384 पाउंड.)

मुझ जैसे ज़्यादातर सैलानी यहां की दूसरी गुफाओं की ओर रुख करते हैं. कुछ गुफाओं में चलने के लिए बोर्डवॉक (लकड़े के प्लेटफॉर्म) बनाए हैं और वहां की स्टैलैक्टाइट (ऊपर से नीचे की ओर लटकते) और स्टैलैग्माइट (नीचे से ऊपर की ओर खड़े) स्तंभों को रौशन कर दिया गया है.

अन्य गुफाएं अनछुई हैं. उन तक पहुंचने के लिए गाइड के साथ जंगल में रात भर पैदल चलना पड़ता है.

इस भूमिगत संसार का विस्तार हो रहा है. हर साल नई गुफाएं सैलानियों के लिए खोली जा रही हैं.

ब्रिटिश केव रिसर्च एसोसिएशन के होवार्ड लिम्बर्ट कहते हैं, "हमने अब तक केवल 30 फीसदी क्षेत्र की खोज की है, अभी बहुत कुछ खोजना बाकी है."

लिम्बर्ट 1990 में पहली बार अपनी पत्नी डेब के साथ वियतनाम आए थे. वे यहीं रह गए और गुफाओं को आम लोगों के लिए खोलने में स्थानीय ऑपरेटरों की मदद करने लगे.

2013 में सोन दुंग गुफा खुलवाने में भी उनका योगदान रहा था.

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कुदरती गुफाएं

होवार्ड के मुताबिक 45 करोड़ साल पुराने चूना-पत्थर क ढेर और क्वांग बिन्ह में होने वाली भारी बारिश गुफा निर्माण के लिए आदर्श स्थितियां बनाते हैं.

बारिश का पानी पत्थरों के बीच से अपना रास्ता बनाता है, जिससे धीरे-धीरे भूमिगत नदियां और तालाब बन जाते हैं जो कई किलोमीटर लंबे हो सकते हैं.

कुछ गुफाओं में छत पर भी पानी के निशान दिखते हैं, जो फर्श से सैकड़ों मीटर ऊपर हो सकते हैं. ये निशान तब बनते हैं जब मानसून के दिनों में पूरी गुफा पानी से भर जाती है.

इन प्राकृतिक आकर्षणों का केंद्र है फोंग न्हा-के बांग नेशनल पार्क. तटीय शहर डोंग होई से यहां 50 मिनट में पहुंचा जा सकता है.

फोंग न्हा गांव में पहाड़ी नदी के किनारे-किनारे कई किलोमीटर तक गेस्ट हाउस बने हैं, जिनको यहीं के लोग चलाते हैं.

स्थानीय लोग नदी में लंबी नावें चलाते हैं और लंबे डंडे से नदी की घास काटते हैं जो मछलियों के फार्म में चारे के काम आती है.

यहां अभी तक कोई रिजॉर्ट नहीं बना और सारा कारोबार स्थानीय लोग ही चलाते हैं.

गांव के सबसे करीब की गुफा फोंग न्हा है, जहां नाव से पहुंचा जाता है. लेकिन मैंने नेशनल पार्क से होते हुए दूसरा रास्ता चुना.

50 किलोमीटर लंबे इस रास्ते में कई गुफाएं, जैविक उद्यान और एक-दो जिप लाइनें भी हैं.

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सफ़र की शुरुआत

मोटरबाइक से मैं पुराने हो ची मिन्ह रोड (वियतनाम युद्ध के दौरान सैनिकों और सैन्य उपकरणों को ले जाने वाला मार्ग) पर बढ़ा.

गांव से नेशनल पार्क तक का रास्ता ख़ूबसूरत है. पहाड़ हरियाली से लदे हैं. पेड़ों की डालियां एक-दूसरे से जुड़कर छतरी जैसे बना देती हैं. नीचे नदी में मटमैला पानी बहता है.

मैं एक गुफा के पास बनी सैनिकों की समाधि 'हांग ताम को' के पास रुका. यहां उन वियतनामी सैनिकों की समाधि है जो 1972 में अमरीकी बमबारी में घिर गए थे और अंधेरे में मारे गए थे.

अगले पड़ाव पर मैं पैराडाइज गुफा थिएन डुओंग के पास रुका, जिसे 2011 में खोला गया था.

एक गोल्फ कार्ट मुझे पेड़ों के बीच बने ऊंचे लकड़ी के रास्ते से होते हुए एक सीढ़ी तक ले गई. लकड़ी की यह सीढ़ी 32 किलोमीटर लंबी विशाल गुफा के चैंबर में उतरती है.

मैंने अब तक जितनी भी गुफा देखी है उनमें हांग ताम को में सांस लेना सबसे आसान था.

लेकिन क्वांग बिन्ह को दुनिया का सबसे बड़ा गुफा पर्यटन केंद्र बनाती हैं दूरदराज की गुफाएं.

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दूरदराज की गुफाएं

दो स्थानीय आउटफिटर्स ऑक्सालिस और जंगल बॉस गुफाओं तक विशेष पहुंच रखते हैं. ये अलग-अलग तरह के मेहमानों के लिए तैयार रहते हैं.

मैंने उनकी रात वाली यात्रा के लिए मना कर दिया और तीन एकदिवसीय दौरों का फ़ैसला किया.

मुझे सबसे पहले हांग टिएन (परी गुफा) के नाम ने लुभाया. मैं एक दर्जन अन्य यात्रियों के साथ था. हमारे साथ अंग्रेजी बोलने वाले दो गाइड और सामान उठाने के लिए दो कुली थे.

तू लान गुफाओं का नेटवर्क नेशनल पार्क के 70 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में है. यहां की पहाड़ों पर फ़िल्म "कॉन्ग : स्कल आइलैंड" की शूटिंग हुई थी.

मैं वैन की खिड़की से ही चिपका रहा ताकि हरी-भरी पहाड़ी चोटियों को देख सकूं.

हमारी चढ़ाई एक धूलभरी सड़क से शुरू हुई. आगे का जंगल दुर्गम लग रहा था. पतली पगडंडी को झाड़ियों-लताओं ने और संकरा बना दिया था.

चलते हुए हमारे गाइड थाम 'केटी' गुयेन ने काले भालू के पैरों के निशान और हमारे ऊपर पेड़ों पर बैठे बंदर की ओर इशारा किया.

हवा नमी से भारी हो गई थी. मैं तुरंत ही पसीने से तर-बतर हो गया. कुछ घंटों बाद हम पहाड़ के एक कोने पर पहुंच गए.

गुफा के अंदर चूने-पत्थर की बड़ी चट्टानें थी. सीढ़ीनुमा पत्थरों पर हरे फ़र्न उगे हुए थे. हमारे हेड लैंप अंधेरे को चीर रहे थे.

हम जिस भी चैंबर में पहुंचे, उसकी अपनी ख़ासियत थी. पत्थरों की संचरना कुंडली मारकर बैठे विशाल सांप की तरह थी.

लगभग एक किलोमीटर अंदर चलने पर हम नीली दरिया तक पहुंचे. अगले कुछ दिनों में मेरे मन में गुफाओं के प्रति सम्मान गहरा हो गया.

मा दा घाटी से वियतनाम युद्ध के समय की एक गाड़ी हम आठ सैलानियों को वापस नेशनल पार्क ले आई.

हमने नदियां पार की, लकड़ी के लट्ठों से बने पुल पर चढ़े. भूमिगत नदी के गहरे पानी में करीब एक किलोमीटर तक तैराकी की, जहां चमगादड़ हमारे ऊपर उड़ रहे थे.

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युद्ध के निशान

एक दूसरी गुफा में हमें उत्तरी वियतनामी सैनिकों की पुरानी बोतलें, जूते और चमड़ों के बैग मिले.

हमारे स्थानीय गाइड दाओ यू कई-कई दिनों तक जंगल में खोज करते हैं. उन्होंने ख़ुद कई गुफाओं को खोजा है.

यू कहते हैं, "गुफा खोजनी हो तो नदी का पीछा कीजिए. मैंने तीन महीने पहले एक गुफा खोजी है. अभी तक उसका नाम नहीं रखा है."

मैं यहां गुफा के नामकरण के लिए नहीं आया था, लेकिन मैं इन गुफाओं में पहुंचने वाला पहला अमरीकी ज़रूर बन गया.

फोंग न्हा के करीब 80 किलोमीटर दक्षिण पूर्व में वो गुयेन गियाप गुफा का नाम उत्तरी वियतनाम के जनरल के नाम पर पड़ा था, जिन्होंने 1954 में फ्रांस को हराया था और 1970 के दशक में अमरीका और दक्षिणी वियतनाम की सेना को.

गियाप यहीं पास में पैदा हुए थे. वियतनाम युद्ध के दौरान कुछ साल तक वे 5 किलोमीटर गहरी गुफा में रहे थे.

मैं इस गुफा के संकरे चैंबरों में घूमा. फिर हम वान किउ गांव गए और स्थानीय लोगों के साथ लंच किया. उन्होंने जगल में मिलने वाली कुदरती दवाइयों की कहानियां सुनाई.

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युद्ध के नायक

गियाप का निधन 102 साल की उम्र में 2013 में हुआ था. वह अमरीकी बमों से बचने के लिए गुफाओं में रहते थे.

शांति स्थापित हो जाने के बाद उन्होंने यहां पर्यटन की संभावना देखी थी.

मृत्यु के बाद भी वह क्वांग बिन्ह की मदद कर रहे हैं ताकि वह वियतनाम के दूसरे कुदरती अजूबों की तरह विकास की अंधी दौड़ में शामिल न हो जाए.

1992 में वह होवार्ड और डेब लिम्बर्ट से दोपहर के भोजन पर मिले थे. तब से इस क्षेत्र के संरक्षक के रूप में उनकी भूमिका और बढ़ गई थी.

डेब कहती हैं, "हमें महसूस नहीं हुआ था कि वह कौन हैं. लेकिन वह महत्वपूर्ण थे क्योंकि उनके साथ कई लोगों का दल था."

गियाप फोंग न्हा के आसपास गुफाओं की तलाश से अभिभूत थे. लंच के तुरंत बाद उन्होंने लिम्बर्ट दंपति को खत लिखा और उनके काम की तारीफ की.

होवार्ड कहते हैं, "वह अपने समय से बहुत आगे थे."

इन वर्षों में कई बार पहाड़ों पर खनन, लकड़ी कटाई या केबल कार प्रोजेक्ट लगाने की कोशिश हुई. लिम्बर्ट दंपति ने हमेशा गियाप की मदद ली.

गुफाओं ने कई तरह से इंसान का साथ दिया है. उन्होंने हमें आसरा दिया है, खाली कैनवस दिए हैं, कहानियों के रूपक दिए हैं, विज्ञान को समझने का स्रोत दिया है.

क्वांग बिन्ह की गुफाएं न सिर्फ़ साहसी लोगों के लिए एक आश्चर्यलोक बनाते हैं, बल्कि वे दक्षिण-पूर्व एशिया के सबसे ख़ूबसूरत क्षेत्रों में से एक के संरक्षण की उम्मीद भी जगाते हैं.

(यह लेख बीबीसी ट्रैवल की कहानी का अक्षरश: अनुवाद नहीं है. हिंदी पाठकों के लिए इसमें कुछ संदर्भ और प्रसंग जोड़े गए हैं. मूल लेख आप यहांपढ़ सकते हैं. बीबीसी ट्रैवलके दूसरे लेख आप यहां पढ़ सकते हैं.)

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