किगाली अफ़्रीका के दूसरे सभी शहरों से अलग है, लेकिन कैसे?

  • 15 जनवरी 2020
अफ्रीका का किगाली शहर इमेज कॉपीरइट BBC Travel

किगाली में गाकरिरो के लोकप्रिय बेकरी-कैफ़े ला ब्रियोशे की छत पर बैठकर मैं शाम का धुंधलका छाते हुए देख रहा था.

सड़कों पर रोशनी चमकने लगी थी और हवा में ठंड का अहसास होने लगा था. मैं अपने कैपेचिनो और डेमी-बुगाटी ब्रेड के साथ बैठा था और रवांडा की मशहूर लेखिका बीटा उमुबैये मायेरेसी की लघु कहानियों का संग्रह पढ़ रहा था.

मेरे फ़ोन की बैटरी ख़त्म हो रही थी. मैंने बगल की टेबल पर बैठे युवक से पूछा कि क्या उसके पास चार्जर है. उसे मैंने अंग्रेज़ी में बात करते सुना था. वैसे यहां ज़्यादातर लोग तीन भाषाएं जानते हैं फिर भी जांच लेना ज़रूरी है.

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Image caption किगाली में कई नई आर्ट गैलरी खुली हैं जिसकी वजह से स्थानीय कला को मंच मिला है

उसके पास चार्जर नहीं था. वह फिर से अपने मैकबुक में खो गया और मैं अपनी किताब में. एक मिनट बाद ही वह मेरे पास आया.

"मैं पास में ही एक नई फ़ोटो गैलरी के उद्घाटन में जा रहा हूं. वहां मज़ा आएगा. क्या आप भी चलना चाहेंगे."

फॉक्सवैगन टैक्सियां

मैंने स्थानीय राइड-शेयर ऐप 'मूव' से एक टैक्सी मंगवाई. उसके बेड़े में पास के ही प्लांट में तैयार फॉक्सवैगन कारें हैं.

हम तुरंत ही किगाली सेंटर फ़ॉर फोटोग्राफी पहुंच गए. कैफ़े में मिला 23 साल का थियो वहां सबको जानता था.

जोसेफैट किगाली फ़िल्म एंड टेलीविज़न स्कूल में फ़िल्म की पढ़ाई कर रहे हैं. रॉड्रिगेज़ स्थानीय रेडियो स्टेशन 103.6 हॉट एफ़एम पर शो करती हैं.

निज़ा ने एक संगठन बनाया है जो बेरोज़गार महिलाओं को पारंपरिक टोकरी बुनना सिखाता है और वंचित युवाओं को पेंट करने की जगह और साधन मुहैया कराता है. ज़ाक गैलरी डायरेक्टर हैं. विन्नी मिक्सोलॉजी कंपनी स्वीट इबांगा की मालकिन हैं, जो पार्टियां आयोजित कराती हैं.

किगाली को व्यावहारिक रूप से अफ्रीका के दूसरे किसी भी शहर के मुक़ाबले पटरी पर आने के लिए ज़्यादा कोशिश करनी पड़ी है.

इन शहरों में मोगादिशु और दक्षिणी सूडान का जुबा भी शामिल हैं, जिनको अब भी उबरना है.

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Image caption उमुगांडा का मक़सद देश के लोगों को साथ लाना है

कैसे बदला किगाली?

पिछले 25 सालों में, ख़ासकर पिछले दशक में, राष्ट्रपति पॉल कागामे ने नये नियम और नीतियां बनाकर किगाली को बदल दिया है.

इसमें वहां के लोगों का भी योगदान है जिन्होंने किगाली को अफ्रीका का सबसे दोस्ताना शहर बना दिया है.

किगाली के ठोस बुनियादी ढांचे और इसके तेज़ी से विकास के पीछे कई कारक हैं. लेकिन एक चीज़ सबसे अलग है. वह है उमुगांडा.

हर महीने के आख़िरी शनिवार को सुबह 8 बजे से 11 बजे तक रवांडा के हर परिवार से 18 साल से लेकर 65 साल के कम से कम एक व्यक्ति को घर से बाहर निकलकर सफ़ाई, मरम्मत या रखरखाव का काम करना पड़ता है.

उमुगांडा रवांडा की सरकारी भाषा किन्यारवांडा का शब्द है जिसका मतलब है "सामुदायिक सेवा".

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Image caption किगाली ना केवल साफ़ और सुरक्षित जगह है लेकिन बहुत दोस्ताना है

सामुदायिक सेवा

यह रवांडा की विरासत का हिस्सा है. सरकार ने इसे 1998 में बढ़ावा देना शुरू किया गया था और 10 साल पहले यह क़ानून बना.

बिना किसी वजह के उमुगांडा में शामिल नहीं होने पर जुर्माना लग सकता है, लेकिन मैंने जिससे भी बात की, वे इसके पक्ष में दिखे.

27 साल की एस्पेरेंस इगिहोज़ो कहती हैं, "मैं बहुत छोटी थी जब यह शुरू हुआ था." वह एक गेस्ट हाउस और बाहरी छात्रों और पर्यटकों को रवांडा की संस्कृति के बारे में बताती हैं.

लोकल कॉफी चेन बॉर्बोन कॉफी (इसकी शाखाएं वाशिंगटन, डीसी, कैंब्रिज, मैसासुएट्स में भी हैं) में एस्पेरेंस बताती हैं कि यह कैसे और क्यों काम करता है.

"अब सभी जानते हैं कि क्या करना है. मैं किचिकुरु (एयरपोर्ट के करीब) में रहती हूं. हमारे यहां करीब 10-10 घरों के 'सेल्स' हैं."

हर सेल का एक वॉट्सऐप ग्रुप है जिससे वे संपर्क में रहते हैं. वे मिलते हैं और आपस में काम बांट लेते हैं. कोई झाड़ू लगाता है, कोई झाड़ियां काटता है.

किगाली में अब सब कुछ साफ है, लेकिन लोग इसे लगातार साफ रखते हैं. उमुगांडा उन्हें सामाजिक बनाता है.

एयरपोर्ट से आने के रास्ते में मैंने नोटिस किया था कि किगाली बहुत साफ-सुथरा है.

यहां वर्षों पहले से प्लास्टिक पर पाबंदी है. (मेरी फ्लाइट में एक सरकारी घोषणा भी हुई थी कि मैं अपने सामान की जांच करूं और अगर उसमें प्लास्टिक का थैला हो तो उसे प्लेन में ही छोड़ दूं).

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Image caption किगाली में आपको कुछ ही घंटों में कपड़े सिलकर तैयार मिल जाएंगे

100 दिनों का नरसंहार

रवांडा में 100 दिनों के नरसंहार को 26 साल हो गए. वह 20वीं सदी का सबसे भयंकर गृह युद्ध था जिसमें नस्लीय समूह आपस में भिड़ गए थे और करीब 8 लाख लोगों की मौत हो गई थी.

अब उन समूहों का नाम लेना भी अपराध है. एस्पेरेंस ने बताया कि मैं पर्यटक हूं और मैं किसी भी तरह की बात करने और सवाल पूछने के लिए आज़ाद हूं.

लेकिन अगर एस्पेरेंस को रवांडा के किसी दूसरे व्यक्ति के साथ बातचीत में लोगों को तुत्सी या हूतू कहते सुन लिया गया तो उनको गिरफ्तार किया जा सकता है.

उमुगांडा इस आधिकारिक धारणा को मज़बूत करता है कि रवांडा में अब कोई समूह नहीं है और हर कोई बस रवांडा का आम नागरिक है. अब तक यह कारगर है.

'गो किगाली टूर्स' की गाइड डिजाइरी इज़ेरे ने जितना शहर मुझे दिखाया, वह साफ सुरक्षित और दोस्ताना है. अमरीका ने किगाली को सुरक्षा के लिहाज से बैंकूवर के साथ लेवल 1 में रखा है.

अफ्रीकी रेस्तरां, बार, कैफ़े और सिलाई दुकानों के लिए मशहूर मुस्लिम बहुल न्यामिरैंबो में टहलने के दौरान लोग हाथ हिलाकर मेरा अभिवादन करते रहे.

किमिसगरा बाजार में घूमते हुए इज़ेरे ने बताया कि किसी पर्यटक को उनका शहर कैसे घूमना चाहिए. किमिसगरा बाजार में सूखी बीन्स, पुराने कपड़े और दर्जन के हिसाब से केले मिलते हैं. इज़ेरे सबसे पहले नरसंहार स्मारक जाने की सलाह देती हैं.

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Image caption बीते 25 सालों में किगाली शहर में बहुत कुछ बदल गया है

नरसंहार स्मारक

"वहां आपको पता चलेगा कि किगाली क्या है और आज यह जहां तक पहुंचा है वहां तक कैसे पहुंचा है और यहां क्या हुआ था."

"उसके बाद मैं कहूंगी कि आपको रात में बार जाना चाहिए और कुछ ब्रॉशेट (आग पर पका बकरे का मांस) खाना चाहिए."

यही किगाली है: रोजमर्रा की ज़िंदगी, साधारण खाना, शांतिप्रिय लोग, इतिहास नहीं, संघर्ष नहीं, नरसंहार नहीं.

इज़ेरे के मुताबिक रवांडा का पारंपरिक खानपान विविधताओं से भरा नहीं है. सबसे आम पारंपरिक व्यंजन है बीन्स के साथ उबाले गए शकरकंद. चौलाई (ऐमरैन्थ) के पत्तों और ब्रोशेट से बना डोडो भी पसंद किया जाता है.

इज़ेरे ने आधे दर्जन बार और कैफ़ै के नाम गिनाए और मैं सभी जगह हो आया.

रीपब लाउंज में पूर्व इंटीरियर डिजाइनर और टोरंटो के निवासी डूडो, जो 1994 में नरसंहार के ख़िलाफ लड़ने आए थे, एक ज़िंदादिल नाइट पार्टी की अध्यक्षता करते हैं. वहां दूतावासों के स्थानीय कर्मचारी अपने विदेशी साथियों को लेकर आते हैं.

शहर के बीचोंबीच खुली छत की बार वाले होटल दि उबुंवे ग्रैंड में कोई भी अपना अच्छा वक़्त बिताना चाहेगा. इज़ेरे कहती हैं, "यह वह जगह है जहां लड़के सॉरी कहने के लिए लड़कियों को लाते हैं."

वह गुरुवार की रात इनेमा आर्ट सेंटर में भी जाने की सलाह देती हैं, जहां की दो मंजिला इमारत में नियमित रूप से करीब 400 लोग जमा होते हैं.

किगाली की कला

किगाली में यह जगह समलैंग लोगों, उभयलिंगी लोगों, ट्रांसजेंडर और क्वीयर लोगों का केंद्र है.

इसके संस्थापक इनॉसेंट कुरुन्ज़िज़ा का कहना है कि स्थानील कला फल-फूल रही है. इनेमा की क़ामयाबी के बाद आधे दर्जन गैलरी खुली हैं.

कुरुन्ज़िज़ा गूलर की सिली हुई छाल पर तैल-चित्र बनाते हैं जो न्यूयॉर्क की सिटी गैलरी में प्रदर्शित होने वाली है. उनकी पेंटिंग्स लॉरेन पॉवेल जॉब्स (स्टीव जॉब्स की पत्नी) और अन्य हस्तियों के निजी संग्रह में पहले से ही मौजूद हैं.

वह एक साल पुराने सरकारी विज्ञापन अभियान "मेड इन रवांडा" का जिक्र करते हुए कहते हैं, "हम रवांडा को इसकी कला के माध्यम से बढ़ाना चाहते हैं."

"जब आप रवांडा के बारे में सोचते हैं तो आप नरसंहार और गुरिल्ला के बारे में सोचते हैं. लेकिन कला के बारे में क्या?"

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फलता-फूलता फ़ैशन

फ़ैशन रवांडा में नई चीज़ है लेकिन इस क्षेत्र में कई कंपनियां खड़ी हो गई हैं. मोजेज तुरहिरवा का मोशंस नई कंपनी है.

पुरुषों और महिलाओं के उनके कलेक्शन में पारंपरिक काले-सफेद और ज्यामितीय पैटर्न शामिल किए गए हैं. उन पर बीडिंग, कढ़ाई और पेंट के छींटे हैं.

तुरहिरवा यूरोपियन डिजाइनरों, जैसे बाल्मेन के ओलिवर रूस्टिंग की कद्र करते हैं, लेकिन वह स्थानीय डिजाइनरों जैसे डेडि दि मैक्सिमो, जो अब इस्तोनिया में रहते हैं और किगाली के अन्य डिजाइनरों से प्रेरणा लेते हैं.

वह रवांडा के शाही घराने के सदस्यों और कर्मचारियों की छड़ियों की तरह भव्य बीडिंग वाली छड़ियां दिखाते हुए कहते हैं, "हम लग्जरी पर ध्यान दे रहे हैं."

"हम सरकारी अधिकारियों, सीईओ, बैंकरों और ख़ास लोगों से डील करते हैं."

उनका सबसे ज़्यादा बिकने वाला आइटम है ऊनी कार्डिगन जिसमें शॉल लैपेल सूट पर सैकड़ों काले-सफेद मोतियों को करीने से गूंथा गया है. वह हर महीने ऐसे करीब 35 कार्डिगन बेचते हैं.

तुरहिरवा का ब्रांड सिर्फ़ 4 साल पुराना है लेकिन यह यूरोप में पहुंच चुका है और अमरीका पहुंचने की तैयारी कर रहा है.

मैं निज़ा के साथ मोशंस बुटीक पहुंचा, जिनसे मैं थियो की पिक्चर पार्टी में मिला था. वह 23 साल के हैं और उन्होंने दो संगठन की स्थापना की है.

तुरहिरवा 28 साल के है. इज़ेरे 24 साल की हैं. एस्पेरेंस 27 की हैं. रेडियो होस्ट रॉड्रिगेज़ 28 साल की हैं. इनेमा आर्ट सेंटर के कुरुन्ज़िजा 33 साल के हैं.

नरसंहार के 26 साल बाद युवा उसका खामियाजा उठाने को तैयार नहीं हैं. वे आगे बढ़ रहे हैं.

हर महीने एक सुबह सफाई, मरम्मत और सामुदायिक सेवा में लगकर वे रवांडा को दुनिया के साथ मिलाने में मदद कर रहे हैं. वे अगले 26 साल के लिए देश का खुशहाल भविष्य बना रहे हैं.

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